सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जग महुँ सखा निसाचर जेते। लछिमनु हनइ निमिष महुँ तेते।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दक्योंकि हे सखे! जगत्में जितने भी राक्षस हैं, लक्ष्मण क्षणभरमें उन सबको मार सकते हैं और यदि वह भयभीत होकर मेरे शरण आया है तो मैं उसे प्राणोंकी तरह रखूँगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 754 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जग महुँ सखा निसाचर जेते। लछिमनु हनइ निमिष महुँ तेते।।
जौं सभीत आवा सरनाई। रखिहउँ ताहि प्रान की नाई।।
स्रोत अभिलेख 5.44 · पुस्तक पृ. 754, 754
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जग महुँ सखा निसाचर जेते। लछिमनु हनइ निमिष महुँ तेते।।
English explanation
My friend, however many demons there are in the world, Lakshmana can slay them all in the blink of an eye.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जग | संसार | the world |
| महुँ | में | in |
| सखा | हे मित्र | O friend |
| निसाचर | राक्षस | demons |
| जेते | जितने भी | however many |
| लछिमनु | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| हनइ | मार सकते हैं | can slay |
| निमिष | पलक झपकने का समय | a blink of an eye |
| महुँ | में | in |
| तेते | उतने सभी | all that many |
2 जौं सभीत आवा सरनाई। रखिहउँ ताहि प्रान की नाई।।
English explanation
If he has come in fear seeking refuge, I will protect him as I would my own life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| सभीत | भयभीत | afraid |
| आवा | आया है | has come |
| सरनाई | शरण में | seeking refuge |
| रखिहउँ | मैं रक्षा करूँगा | I will protect |
| ताहि | उसे | him |
| प्रान | अपने प्राणों | my own life |
| की | के | of |
| नाई | समान | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 754
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 754, 754
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।