सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ कृपा करि पूँछेहु जैसें। मानहु कहा क्रोध तजि तैसें।।
मूल पाठ
नाथ कृपा करि पूँछेहु जैसें। मानहु कहा क्रोध तजि तैसें।।
मिला जाइ जब अनुज तुम्हारा। जातहिं राम तिलक तेहि सारा।।
स्रोत अभिलेख 5.54 · पुस्तक पृ. 762, 763
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[दूतने कहा—] हे नाथ! आपने जैसे कृपा करके पूछा है, वैसे ही क्रोध छोड़कर मेरा कहना मानिये (मेरी बातपर विश्वास कीजिये)। जब आपका छोटा भाई श्रीरामजीसे जाकर मिला, तब उसके पहुँचते ही श्रीरामजीने उसको राजतिलक कर दिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 762 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नाथ कृपा करि पूँछेहु जैसें। मानहु कहा क्रोध तजि तैसें।।
English explanation
My lord, just as you have graciously asked, set aside anger and accept what I say.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| कृपा | दयापूर्वक | graciously |
| करि | करके | having shown |
| पूँछेहु | आपने पूछा | you asked |
| जैसें | जिस प्रकार | just as |
| मानहु | मानिए | please accept |
| कहा | मेरी कही बात | what I say |
| क्रोध | रोष | anger |
| तजि | छोड़कर | setting aside |
| तैसें | उसी प्रकार | so too |
2 मिला जाइ जब अनुज तुम्हारा। जातहिं राम तिलक तेहि सारा।।
English explanation
When your younger brother went and met Rama, Rama performed his royal consecration as soon as he arrived.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिला | मिला | met |
| जाइ | जाकर | having gone |
| जब | जब | when |
| अनुज | छोटा भाई विभीषण | younger brother, Vibhishana |
| तुम्हारा | आपका | your |
| जातहिं | जाते ही | as soon as he arrived |
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| तिलक | राज्याभिषेक | royal consecration |
| तेहि | उसका | his |
| सारा | संपन्न किया | performed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.54
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 762
- सहायक विषय
- दूतका रावणको समझाना और लक्ष्मणजीका पत्र देना
- मुद्रित पृष्ठ
- 762, 763
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।