सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुरत नाइ लछिमन पद माथा। चले दूत बरनत गुन गाथा।।
मूल पाठ
तुरत नाइ लछिमन पद माथा। चले दूत बरनत गुन गाथा।।
कहत राम जसु लंकाँ आए। रावन चरन सीस तिन्ह नाए।।
स्रोत अभिलेख 5.53 · पुस्तक पृ. 761, 762
भावार्थ
मूल पाठ के बादलक्ष्मणजीके चरणोंमें मस्तक नवाकर, श्रीरामजीके गुणोंकी कथा वर्णन करते हुए दूत तुरंत ही चल दिये। श्रीरामजीका यश कहते हुए वे लङ्कामें आये और उन्होंने रावणके चरणोंमें सिर नवाये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 761 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तुरत नाइ लछिमन पद माथा। चले दूत बरनत गुन गाथा।।
English explanation
AI-generated draft rendering: Bowing their heads at Lakshmana’s feet at once, the messengers departed, recounting his virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुरत | तुरंत | immediately |
| नाइ | नवाकर | having bowed |
| लछिमन | लक्ष्मण के | of Lakshmana, Rama’s brother |
| पद | चरणों में | at the feet |
| माथा | माथा | their heads |
| चले | चल पड़े | departed |
| दूत | दूत | the messengers |
| बरनत | वर्णन करते हुए | recounting |
| गुन | गुणों की | of virtues |
| गाथा | गाथा | the account |
2 कहत राम जसु लंकाँ आए। रावन चरन सीस तिन्ह नाए।।
English explanation
Recounting Rama’s glory, they reached Lanka and bowed their heads at Ravana’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | recounting |
| राम | राम का | of Rama |
| जसु | यश | glory |
| लंकाँ | लंका में | in Lanka |
| आए | आए | arrived |
| रावन | रावण के | of Ravana, Lanka’s king |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| सीस | सिर | their heads |
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| नाए | नवाए | bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.53
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 761
- सहायक विषय
- समुद्र पार करनेके लिये विचार, रावणदूत शुकका आना और लक्ष्मणजीके पत्रको लेकर लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 761, 762
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।