सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तव उर कुमति बसी बिपरीता। हित अनहित मानहु रिपु प्रीता।।
मूल पाठ
तव उर कुमति बसी बिपरीता। हित अनहित मानहु रिपु प्रीता।।
कालराति निसिचर कुल केरी। तेहि सीता पर प्रीति घनेरी।।
स्रोत अभिलेख 5.4 · पुस्तक पृ. 750, 751
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपके हृदयमें उलटी बुद्धि आ बसी है। इसीसे आप हितको अहित और शत्रुको मित्र मान रहे हैं। जो राक्षसकुलके लिये कालरात्रि [के समान] हैं, उन सीतापर आपकी बड़ी प्रीति है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 751 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तव उर कुमति बसी बिपरीता। हित अनहित मानहु रिपु प्रीता।।
English explanation
Perverse judgment has settled in your heart: you regard what benefits you as harmful, and your enemy as dear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | तुम्हारे | your |
| उर | हृदय में | in the heart |
| कुमति | बुरी बुद्धि | bad judgment |
| बसी | बस गई है | has settled |
| बिपरीता | उलटी; विपरीत | perverse; inverted |
| हित | भलाई को | what benefits you |
| अनहित | हानिकारक | harmful |
| मानहु | मानते हो | you regard |
| रिपु | शत्रु को | the enemy |
| प्रीता | प्रिय | dear |
2 कालराति निसिचर कुल केरी। तेहि सीता पर प्रीति घनेरी।।
English explanation
You are deeply attached to that very Sita who is like a night of destruction for the demon clan.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कालराति | विनाश की रात्रि | a night of destruction |
| निसिचर | राक्षसों के | of the demons |
| कुल | कुल | clan |
| केरी | की; के लिए | of; for |
| तेहि | उन्हीं | that very |
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| पर | के प्रति | toward |
| प्रीति | आसक्ति | attachment |
| घनेरी | बहुत गहरी | very deep |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 751
- सहायक विषय
- रावणको विभीषणका समझाना और विभीषणका अपमान
- मुद्रित पृष्ठ
- 750, 751
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।