सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं रघुबीर होति सुधि पाई। करते नहिं बिलंबु रघुराई।।
मूल पाठ
जौं रघुबीर होति सुधि पाई। करते नहिं बिलंबु रघुराई।।
रामबान रबि उएँ जानकी। तम बरूथ कहँ जातुधान की।।
स्रोत अभिलेख 5.16 · पुस्तक पृ. 729, 729
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीने यदि खबर पायी होती तो वे विलम्ब न करते। हे जानकीजी! रामबाणरूपी सूर्यके उदय होनेपर राक्षसोंकी सेनारूपी अन्धकार कहाँ रह सकता है?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 729 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं रघुबीर होति सुधि पाई। करते नहिं बिलंबु रघुराई।।
English explanation
Had Rama received news of you, he would not have delayed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम को | to Rama, hero of Raghu’s lineage |
| होति | होती; मिल गई होती | had been |
| सुधि | आपका समाचार | news of you |
| पाई | प्राप्त | received |
| करते | करते | would have made |
| नहिं | नहीं | not |
| बिलंबु | देरी | delay |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
2 रामबान रबि उएँ जानकी। तम बरूथ कहँ जातुधान की।।
English explanation
Janaki, when the sun of Rama’s arrows rises, where can the demon host, like darkness, remain?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामबान | राम के बाण | Rama’s arrows |
| रबि | सूर्य | sun |
| उएँ | उदय होने पर | upon rising |
| जानकी | हे जानकी, जनक की पुत्री सीता | O Janaki, Sita, daughter of Janaka |
| तम | अंधकार | darkness |
| बरूथ | दल; सेना | host; army |
| कहँ | कहाँ | where |
| जातुधान | राक्षसों | demons |
| की | की | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 729
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 729, 729
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।