सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अबहिं मातु मैं जाउँ लवाई। प्रभु आयसु नहिं राम दोहाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे माता! मैं आपको अभी यहाँसे लिवा जाऊँ; पर श्रीरामचन्द्रजीकी शपथ है, मुझे प्रभु (उन) की आज्ञा नहीं है। [अत:] हे माता! कुछ दिन और धीरज धरो। श्रीरामचन्द्रजी वानरोंसहित यहाँ आवेंगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 729 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अबहिं मातु मैं जाउँ लवाई। प्रभु आयसु नहिं राम दोहाई।।
कछुक दिवस जननी धरु धीरा। कपिन्ह सहित अइहहिं रघुबीरा।।
स्रोत अभिलेख 5.16 · पुस्तक पृ. 729, 729
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अबहिं मातु मैं जाउँ लवाई। प्रभु आयसु नहिं राम दोहाई।।
English explanation
Mother, I could take you away this very moment, but I do not have the Lord’s command—I invoke Rama as my pledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अबहिं | अभी ही | right now |
| मातु | हे माता | O mother |
| मैं | मैं | I |
| जाउँ | चला जाऊँ | could go away |
| लवाई | आपको साथ लेकर | taking you along |
| प्रभु | स्वामी राम की | of Lord Rama |
| आयसु | आज्ञा | command; permission |
| नहिं | नहीं है | do not have |
| राम | भगवान राम की | of Rama |
| दोहाई | दुहाई; शपथपूर्ण पुकार | solemn invocation; pledge |
2 कछुक दिवस जननी धरु धीरा। कपिन्ह सहित अइहहिं रघुबीरा।।
English explanation
Mother, be patient for a few days; Rama will come with the monkeys.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कछुक | कुछ | a few |
| दिवस | दिन | days |
| जननी | हे माता | O mother |
| धरु | धारण कीजिए; रखिए | keep; maintain |
| धीरा | धैर्य | patience |
| कपिन्ह | वानरों के | the monkeys |
| सहित | साथ | with |
| अइहहिं | आएँगे | will come |
| रघुबीरा | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 729
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 729, 729
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।