सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं न होति सीता सुधि पाई। मधुबन के फल सकहिं कि खाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयदि सीताजीकी खबर न पायी होती तो क्या वे मधुवनके फल खा सकते थे? इस प्रकार राजा सुग्रीव मनमें विचार कर ही रहे थे कि समाज-सहित वानर आ गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 740 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जौं न होति सीता सुधि पाई। मधुबन के फल सकहिं कि खाई।।
एहि बिधि मन बिचार कर राजा। आइ गए कपि सहित समाजा।।
स्रोत अभिलेख 5.29 · पुस्तक पृ. 740, 740
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं न होति सीता सुधि पाई। मधुबन के फल सकहिं कि खाई।।
English explanation
If they had not obtained news of Sita, could they have eaten the fruits of Madhuvan?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| न | नहीं | not |
| होति | होती | had been |
| सीता | सीता की | of Sita |
| सुधि | खबर | news |
| पाई | प्राप्त | obtained |
| मधुबन | मधुबन नामक उपवन | Madhuvan, the grove |
| के | के | of |
| फल | फल | fruits |
| सकहिं | वे सक्षम होते | could they |
| कि | क्या | whether; could |
| खाई | खा सकना | eat |
2 एहि बिधि मन बिचार कर राजा। आइ गए कपि सहित समाजा।।
English explanation
As King Sugriva reflected in this way, the monkeys arrived with their whole company.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| मन | मन में | in his mind |
| बिचार | विचार | reflection |
| कर | करते हैं | makes |
| राजा | राजा सुग्रीव | King Sugriva |
| आइ | आ | having come |
| गए | पहुँचे | arrived |
| कपि | वानर | the monkeys |
| सहित | सहित | together with |
| समाजा | पूरे दल | the whole company |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 740
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 740, 740
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।