सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आइ सबन्हि नावा पद सीसा। मिलेउ सबन्हि अति प्रेम कपीसा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसबने आकर सुग्रीवके चरणोंमें सिर नवाया। कपिराज सुग्रीव सभीसे बड़े प्रेमके साथ मिले। उन्होंने कुशल पूछी, [तब वानरोंने उत्तर दिया—] आपके चरणोंके दर्शनसे सब कुशल है। श्रीरामजीकी कृपासे विशेष कार्य हुआ (कार्यमें विशेष सफलता हुई है)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 740 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आइ सबन्हि नावा पद सीसा। मिलेउ सबन्हि अति प्रेम कपीसा।।
पूँछी कुसल कुसल पद देखी। राम कृपाँ भा काजु बिसेषी।।
स्रोत अभिलेख 5.29 · पुस्तक पृ. 740, 740
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आइ सबन्हि नावा पद सीसा। मिलेउ सबन्हि अति प्रेम कपीसा।।
English explanation
On arriving, all bowed their heads at his feet. Sugriva, king of the monkeys, greeted everyone with great affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आइ | आकर | having arrived |
| सबन्हि | सबने | everyone |
| नावा | झुकाया | bowed |
| पद | चरणों में | at his feet |
| सीसा | सिर | their heads |
| मिलेउ | मिले | greeted |
| सबन्हि | सबसे | everyone |
| अति | अत्यंत | very great |
| प्रेम | प्रेम से | with affection |
| कपीसा | वानरों के स्वामी सुग्रीव | Sugriva, lord of the monkeys |
2 पूँछी कुसल कुसल पद देखी। राम कृपाँ भा काजु बिसेषी।।
English explanation
Sugriva asked about their well-being. They replied, ‘We are well on seeing your feet; by Rama’s grace, the great task has been accomplished.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूँछी | पूछी | asked |
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| कुसल | हम कुशल हैं | we are well |
| पद | आपके चरण | your feet |
| देखी | देखकर | upon seeing |
| राम | राम की | of Rama |
| कृपाँ | कृपा से | by grace |
| भा | सिद्ध हुआ | was accomplished |
| काजु | कार्य | the task |
| बिसेषी | विशेष, महत्त्वपूर्ण | great; important |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 740
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 740, 740
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।