सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा। कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउसने योजनभर (चार कोसमें) मुँह फैलाया। तब हनुमान्जीने अपने शरीरको उससे दूना बढ़ा लिया। उसने सोलह योजनका मुख किया। हनुमान्जी तुरंत ही बत्तीस योजनके हो गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 715 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा। कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा।।
सोरह जोजन मुख तेहिं ठयऊ। तुरत पवनसुत बत्तिस भयऊ।।
स्रोत अभिलेख 5.2 · पुस्तक पृ. 715, 716
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा। कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा।।
English explanation
Surasa opened her mouth to a span of one yojana; Hanuman expanded his body to twice that size.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोजन | एक योजन, दूरी का प्राचीन माप | one yojana, an ancient distance unit |
| भरि | भर, तक | to the extent of |
| तेहिं | उसने, सुरसा ने | she, Surasa |
| बदनु | मुख | mouth |
| पसारा | फैलाया | expanded |
| कपि | वानर हनुमान ने | Hanuman, the monkey |
| तनु | शरीर | body |
| कीन्ह | किया | made |
| दुगुन | दुगुना | twice as large |
| बिस्तारा | विस्तार | expanse |
2 सोरह जोजन मुख तेहिं ठयऊ। तुरत पवनसुत बत्तिस भयऊ।।
English explanation
She enlarged her mouth to sixteen yojanas; the wind god’s son immediately grew to thirty-two yojanas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोरह | सोलह | sixteen |
| जोजन | योजन, दूरी का प्राचीन माप | yojanas, an ancient distance unit |
| मुख | मुख | mouth |
| तेहिं | उसने, सुरसा ने | she, Surasa |
| ठयऊ | फैलाया, इतना बड़ा किया | enlarged to that size |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| पवनसुत | पवनदेव के पुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
| बत्तिस | बत्तीस योजन के | thirty-two yojanas in size |
| भयऊ | हो गए | became |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 715
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका लङ्काको प्रस्थान, सुरसासे भेंट, छाया पकड़नेवाली राक्षसीका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 715, 716
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।