सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिन्ह के जीवन कर रखवारा। भयउ मृदुल चित सिंधु बिचारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर जिनके जीवनका रक्षक कोमल चित्तवाला बेचारा समुद्र बन गया है (अर्थात् उनके और राक्षसोंके बीचमें यदि समुद्र न होता तो अबतक राक्षस उन्हें मारकर खा गये होते)। फिर उन तपस्वियोंकी बात बता, जिनके हृदयमें मेरा बड़ा डर है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 762 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जिन्ह के जीवन कर रखवारा। भयउ मृदुल चित सिंधु बिचारा।।
कहु तपसिन्ह कै बात बहोरी। जिन्ह के हृदयँ त्रास अति मोरी।।
स्रोत अभिलेख 5.53 · पुस्तक पृ. 761, 762
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जिन्ह के जीवन कर रखवारा। भयउ मृदुल चित सिंधु बिचारा।।
English explanation
“The poor, tender-hearted ocean has become the protector of their lives.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिनके; उन वानर-भालुओं के | whose; those bears and monkeys |
| के | के | of |
| जीवन | जीवन | lives |
| कर | का | of |
| रखवारा | रक्षक | protector |
| भयउ | हो गया | has become |
| मृदुल | कोमल | tender |
| चित | हृदय वाला | hearted |
| सिंधु | समुद्र | the ocean |
| बिचारा | बेचारा | poor fellow |
2 कहु तपसिन्ह कै बात बहोरी। जिन्ह के हृदयँ त्रास अति मोरी।।
English explanation
“Next tell me about those ascetics, whose hearts are greatly afraid of me.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहु | बताओ | tell me |
| तपसिन्ह | तपस्वियों, राम और लक्ष्मण, की | of the ascetics, Rama and Lakshmana |
| कै | की | of |
| बात | बात; समाचार | account; news |
| बहोरी | फिर | next; again |
| जिन्ह | जिनके | whose |
| के | के | of |
| हृदयँ | हृदय में | in the hearts |
| त्रास | भय | fear |
| अति | बहुत | great |
| मोरी | मेरा; मुझसे | of me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.53
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 762
- सहायक विषय
- समुद्र पार करनेके लिये विचार, रावणदूत शुकका आना और लक्ष्मणजीके पत्रको लेकर लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 761, 762
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