सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करत राज लंका सठ त्यागी। होइहि जब कर कीट अभागी।।
मूल पाठ
करत राज लंका सठ त्यागी। होइहि जब कर कीट अभागी।।
पुनि कहु भालु कीस कटकाई। कठिन काल प्रेरित चलि आई।।
स्रोत अभिलेख 5.53 · पुस्तक पृ. 761, 762
भावार्थ
मूल पाठ के बादमूर्खने राज्य करते हुए लङ्काको त्याग दिया। अभागा अब जौका कीड़ा (घुन) बनेगा (जौके साथ जैसे घुन भी पिस जाता है, वैसे ही नर-वानरोंके साथ वह भी मारा जायगा); फिर भालु और वानरोंकी सेनाका हाल कह, जो कठिन कालकी प्रेरणासे यहाँ चली आयी है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 762 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 करत राज लंका सठ त्यागी। होइहि जब कर कीट अभागी।।
English explanation
“That fool abandoned Lanka while enjoying royal power; the unfortunate fellow will now become a worm in barley.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करत | करते हुए | while exercising |
| राज | राज | royal power |
| लंका | लंका को | Lanka |
| सठ | मूर्ख | the fool |
| त्यागी | छोड़ गया | abandoned |
| होइहि | होगा; बनेगा | will become |
| जब | जौ | barley |
| कर | का | of; in |
| कीट | कीड़ा | worm |
| अभागी | अभागा | the unfortunate fellow |
2 पुनि कहु भालु कीस कटकाई। कठिन काल प्रेरित चलि आई।।
English explanation
“Then tell me about the army of bears and monkeys, which has come here driven by terrible doom.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| कहु | बताओ | tell me |
| भालु | भालुओं की | of bears |
| कीस | वानरों की | of monkeys |
| कटकाई | सेना | the army |
| कठिन | भयंकर | terrible |
| काल | काल; मृत्यु | doom; death |
| प्रेरित | प्रेरित; धकेली हुई | driven; impelled |
| चलि | चलकर | having marched |
| आई | आई है | has come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.53
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 762
- सहायक विषय
- समुद्र पार करनेके लिये विचार, रावणदूत शुकका आना और लक्ष्मणजीके पत्रको लेकर लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 761, 762
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।