सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जासु नाम जपि सुनहु भवानी। भव बंधन काटहिं नर ग्यानी।।
मूल पाठ
जासु नाम जपि सुनहु भवानी। भव बंधन काटहिं नर ग्यानी।।
तासु दूत कि बंध तरु आवा। प्रभु कारज लगि कपिहिं बँधावा।।
स्रोत अभिलेख 5.2 · पुस्तक पृ. 732, 733
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[शिवजी कहते हैं—] हे भवानी! सुनो, जिनका नाम जपकर ज्ञानी (विवेकी) मनुष्य संसार (जन्म-मरण) के बन्धनको काट डालते हैं, उनका दूत कहीं बन्धनमें आ सकता है? किन्तु प्रभुके कार्यके लिये हनुमान्जीने स्वयं अपनेको बँधा लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 732 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जासु नाम जपि सुनहु भवानी। भव बंधन काटहिं नर ग्यानी।।
English explanation
Listen, Bhavani: wise people sever the bonds of worldly existence by repeating Rama’s name—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनका, राम का | whose; Rama’s |
| नाम | नाम | name |
| जपि | जपकर | by repeating |
| सुनहु | सुनो | listen |
| भवानी | हे पार्वती | O Parvati |
| भव | संसार; जन्म-मरण का चक्र | worldly existence; the cycle of birth and death |
| बंधन | बंधनों को | the bonds |
| काटहिं | काट देते हैं | sever |
| नर | मनुष्य | people |
| ग्यानी | ज्ञानवान | wise |
2 तासु दूत कि बंध तरु आवा। प्रभु कारज लगि कपिहिं बँधावा।।
English explanation
Could the messenger of that very Rama come under bondage? Hanuman allowed himself to be bound for his Lord’s work. The reading ‘तरु’ in the first clause is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उन्हीं का, राम का | of that very one; Rama’s |
| दूत | संदेशवाहक; हनुमान | messenger; Hanuman |
| कि | क्या | could; introducing a rhetorical question |
| बंध | बंधन | bondage |
| तरु | अधीन या वश में; ‘बंध तरु’ अर्थात बंधन के अधीन। | Under or subject to; ‘बंध तरु’ means subject to bondage. |
| आवा | आ गया; आ सकता था | came; could come |
| प्रभु | स्वामी राम का | of his Lord Rama |
| कारज | कार्य | work; purpose |
| लगि | के लिए | for |
| कपिहिं | हनुमान ने ही | Hanuman himself |
| बँधावा | अपने को बँधने दिया | allowed himself to be bound |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 732
- सहायक विषय
- हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 732, 733
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।