सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जामवंत कह सुनु रघुराया। जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया।।
मूल पाठ
जामवंत कह सुनु रघुराया। जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया।।
ताहि सदा सुभ कुसल निरंतर। सुर नर मुनि प्रसन्न ता ऊपर।।
स्रोत अभिलेख 5.3 · पुस्तक पृ. 741, 741
भावार्थ
मूल पाठ के बादजाम्बवान्ने कहा—हे रघुनाथजी! सुनिये। हे नाथ! जिसपर आप दया करते हैं, उसे सदा कल्याण और निरन्तर कुशल है। देवता, मनुष्य और मुनि सभी उसपर प्रसन्न रहते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 741 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जामवंत कह सुनु रघुराया। जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया।।
English explanation
Jambavan says, “Listen, Lord Rama! Master, whoever receives your mercy—”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जामवंत | जामवंत, रीछों के वरिष्ठ नायक | Jambavan, the elder bear leader |
| कह | कहते हैं | says |
| सुनु | सुनिए | listen |
| रघुराया | हे रघुकुल के राजा राम | O Rama, king of Raghu’s lineage |
| जा | जिस | whom |
| पर | पर | upon |
| नाथ | हे स्वामी | O Master |
| करहु | करते हैं | bestow |
| तुम्ह | आप | you |
| दाया | दया | mercy |
2 ताहि सदा सुभ कुसल निरंतर। सुर नर मुनि प्रसन्न ता ऊपर।।
English explanation
That person always enjoys good fortune and well-being; gods, humans, and sages remain pleased with them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताहि | उसको | to that person |
| सदा | सदा | always |
| सुभ | शुभ, मंगल | good fortune |
| कुसल | कुशल, कल्याण | well-being |
| निरंतर | लगातार | continually |
| सुर | देवता | gods |
| नर | मनुष्य | humans |
| मुनि | मुनि, ऋषि | sages |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| ता | उस | that person |
| ऊपर | पर | with |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 741
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 741, 741
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।