सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जाकें डर अति काल डेराई। जो सुर असुर चराचर खाई।।
मूल पाठ
जाकें डर अति काल डेराई। जो सुर असुर चराचर खाई।।
तासों बयरु कबहुँ नहिं कीजै। मोरे कहें जानकी दीजै।।
स्रोत अभिलेख 5.22 · पुस्तक पृ. 734, 735
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो देवता, राक्षस और समस्त चराचरको खा जाता है, वह काल भी जिनके डरसे अत्यन्त डरता है, उनसे कदापि वैर न करो और मेरे कहनेसे जानकीजीको दे दो॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 735 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जाकें डर अति काल डेराई। जो सुर असुर चराचर खाई।।
English explanation
Even Time, which devours gods, demons, and all moving and unmoving beings, greatly fears him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाकें | जिनके | whose |
| डर | भय से | in fear of |
| अति | बहुत | greatly |
| काल | काल; मृत्यु | Time; Death |
| डेराई | डरता है | is afraid |
| जो | जो | which |
| सुर | देवताओं को | gods |
| असुर | असुरों को | demons |
| चराचर | समस्त चल और अचल जगत को | all moving and unmoving creation |
| खाई | खा जाता है | devours |
2 तासों बयरु कबहुँ नहिं कीजै। मोरे कहें जानकी दीजै।।
English explanation
Never bear enmity toward him; heed my words and return Janaki.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासों | उनसे | with him |
| बयरु | वैर | enmity |
| कबहुँ | कभी | ever |
| नहिं | नहीं | not |
| कीजै | करो | engage in |
| मोरे | मेरे | my |
| कहें | कहने पर | at the urging |
| जानकी | जानकी, जनक की पुत्री सीता | Janaki, Sita, Janaka’s daughter |
| दीजै | लौटा दो | return |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 735
- सहायक विषय
- हनुमान्-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 734, 735
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।