सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चलत मोहि चूड़ामनि दीन्ही। रघुपति हृदयँ लाइ सोइ लीन्ही।।
मूल पाठ
चलत मोहि चूड़ामनि दीन्ही। रघुपति हृदयँ लाइ सोइ लीन्ही।।
नाथ जुगल लोचन भरि बारी। बचन कहे कछु जनककुमारी।।
स्रोत अभिलेख 5.31 · पुस्तक पृ. 741, 742
भावार्थ
मूल पाठ के बादचलते समय उन्होंने मुझे चूड़ामणि [उतारकर] दी। श्रीरघुनाथजीने उसे लेकर हृदयसे लगा लिया। [हनुमान्जीने फिर कहा—] हे नाथ! दोनों नेत्रोंमें जल भरकर जानकीजीने मुझसे कुछ वचन कहे—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 741 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चलत मोहि चूड़ामनि दीन्ही। रघुपति हृदयँ लाइ सोइ लीन्ही।।
English explanation
As I departed, Sita gave me her crest jewel. Rama took that very jewel and held it to his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलत | चलते समय | while departing |
| मोहि | मुझे, हनुमान को | to me, Hanuman |
| चूड़ामनि | सिर पर पहनने का रत्नाभूषण | crest jewel |
| दीन्ही | दी | gave |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| हृदयँ | हृदय से | to his heart |
| लाइ | लगाकर | holding against |
| सोइ | उसी चूड़ामणि को | that very jewel |
| लीन्ही | ले लिया | took |
2 नाथ जुगल लोचन भरि बारी। बचन कहे कछु जनककुमारी।।
English explanation
My lord, Sita, Janaka’s daughter, spoke a few words with both eyes full of tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी राम | O lord Rama |
| जुगल | दोनों | both |
| लोचन | आँखों में | in her eyes |
| भरि | भरकर | filling |
| बारी | आँसू | tears |
| बचन | वचन | words |
| कहे | कहे | spoke |
| कछु | कुछ | a few |
| जनककुमारी | जनक की पुत्री सीता ने | Sita, Janaka’s daughter |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 741
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 741, 742
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।