सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अनुज समेत गहेहु प्रभु चरना। दीन बंधु प्रनतारति हरना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दछोटे भाईसमेत प्रभुके चरण पकडऩा [और कहना कि] आप दीनबन्धु हैं, शरणागतके दु:खोंको हरनेवाले हैं और मैं मन, वचन और कर्मसे आपके चरणोंकी अनुरागिणी हूँ। फिर स्वामी (आप)ने मुझे किस अपराधसे त्याग दिया?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 742 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अनुज समेत गहेहु प्रभु चरना। दीन बंधु प्रनतारति हरना।।
मन क्रम बचन चरन अनुरागी। केहि अपराध नाथ हौं त्यागी।।
स्रोत अभिलेख 5.31 · पुस्तक पृ. 741, 742
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अनुज समेत गहेहु प्रभु चरना। दीन बंधु प्रनतारति हरना।।
English explanation
Sita said: Clasp the feet of the Lord and his younger brother Lakshmana. The Lord is the friend of the distressed and removes the suffering of those who seek refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | younger brother Lakshmana |
| समेत | सहित | together with |
| गहेहु | पकड़ना | clasp |
| प्रभु | स्वामी राम के | of Lord Rama |
| चरना | चरण | feet |
| दीन | दीन-दुखियों के | of the distressed |
| बंधु | बंधु, सहायक | friend and helper |
| प्रनतारति | शरणागतों की पीड़ा | the suffering of those seeking refuge |
| हरना | हरने वाले | remover |
2 मन क्रम बचन चरन अनुरागी। केहि अपराध नाथ हौं त्यागी।।
English explanation
In thought, deed, and speech, I am devoted to your feet. My lord, for what offense have you forsaken me?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन से | in thought |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| बचन | वचन से | in speech |
| चरन | आपके चरणों में | to your feet |
| अनुरागी | प्रेम रखने वाली | devoted |
| केहि | किस | what |
| अपराध | अपराध के कारण | for an offense |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| हौं | मैं | I |
| त्यागी | त्याग दी गई | have been forsaken |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 742
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 741, 742
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।