सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
खल मंडलीं बसहु दिनु राती। सखा धरम निबहइ केहि भाँती।।
मूल पाठ
खल मंडलीं बसहु दिनु राती। सखा धरम निबहइ केहि भाँती।।
मैं जानउँ तुम्हारि सब रीती। अति नय निपुन न भाव अनीती।।
स्रोत अभिलेख 5.46 · पुस्तक पृ. 755, 756
भावार्थ
मूल पाठ के बाददिन-रात दुष्टोंकी मण्डलीमें बसते हो। [ऐसी दशामें] हे सखे! तुम्हारा धर्म किस प्रकार निभता है? मैं तुम्हारी सब रीति (आचार-व्यवहार) जानता हूँ। तुम अत्यन्त नीतिनिपुण हो, तुम्हें अनीति नहीं सुहाती॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 756 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 खल मंडलीं बसहु दिनु राती। सखा धरम निबहइ केहि भाँती।।
English explanation
You live day and night among the wicked. Friend, how can righteous conduct be maintained there?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खल | दुष्टों की | of wicked people |
| मंडलीं | मंडली में | in the company |
| बसहु | तुम रहते हो | you dwell |
| दिनु | दिन | day |
| राती | रात | night |
| सखा | हे मित्र | O friend |
| धरम | धर्म, सदाचरण | righteous conduct |
| निबहइ | निभता है | is maintained |
| केहि | किस | what |
| भाँती | प्रकार से | in manner |
2 मैं जानउँ तुम्हारि सब रीती। अति नय निपुन न भाव अनीती।।
English explanation
I know all your ways. You are highly skilled in right conduct, and wrongdoing does not appeal to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| जानउँ | जानता हूँ | know |
| तुम्हारि | तुम्हारी | your |
| सब | सभी | all |
| रीती | रीतियाँ, आचरण | ways of conduct |
| अति | अत्यंत | highly |
| नय | नीति में | in right conduct |
| निपुन | निपुण | skilled |
| न | नहीं | not |
| भाव | भाती | appeals to you |
| अनीती | अनीति | wrongdoing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 756
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 755, 756
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।