सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह प्रभु सखा बूझिऐ काहा। कहइ कपीस सुनहु नरनाहा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रभु श्रीरामजीने कहा—हे मित्र! तुम क्या समझते हो (तुम्हारी क्या राय है)? वानरराज सुग्रीवने कहा—हे महाराज! सुनिये, राक्षसोंकी माया जानी नहीं जाती। यह इच्छानुसार रूप बदलनेवाला (छली) न जाने किस कारण आया है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 753 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कह प्रभु सखा बूझिऐ काहा। कहइ कपीस सुनहु नरनाहा।।
जानि न जाइ निसाचर माया। कामरूप केहि कारन आया।।
स्रोत अभिलेख 5.43 · पुस्तक पृ. 753, 754
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कह प्रभु सखा बूझिऐ काहा। कहइ कपीस सुनहु नरनाहा।।
English explanation
Lord Rama said, ‘Friend, what is your judgment?’ The monkey king replied, ‘Listen, O king.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| सखा | हे मित्र | O friend |
| बूझिऐ | समझते हो | do you judge |
| काहा | क्या | what |
| कहइ | कहते हैं | says |
| कपीस | वानरराज सुग्रीव | Sugriva, the monkey king |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| नरनाहा | हे मनुष्यों के स्वामी राम | O Rama, king of men |
2 जानि न जाइ निसाचर माया। कामरूप केहि कारन आया।।
English explanation
‘The deception of demons cannot be fathomed. For what purpose has this one, who can assume any form at will, come?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानी | known |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकती | can be |
| निसाचर | राक्षसों की | of demons |
| माया | माया; छल | deception; illusion |
| कामरूप | इच्छानुसार रूप बदलने वाला | one who assumes forms at will |
| केहि | किस | what |
| कारन | कारण | purpose |
| आया | आया है | has come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 753
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 753, 754
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।