सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उठि बहोरि कीन्हिसि बहु माया। जीति न जाइ प्रभंजन जाया।।
मूल पाठ
उठि बहोरि कीन्हिसि बहु माया। जीति न जाइ प्रभंजन जाया।।
स्रोत अभिलेख 5.19 · पुस्तक पृ. 731, 732
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर उठकर उसने बहुत माया रची; परन्तु पवनके पुत्र उससे जीते नहीं जाते॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 732 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उठि बहोरि कीन्हिसि बहु माया। जीति न जाइ प्रभंजन जाया।।
English explanation
Rising again, Meghanada employed many magical illusions, but Hanuman, the wind-god's son, could not be overcome.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उठि | उठकर | having risen |
| बहोरि | फिर | again |
| कीन्हिसि | उसने कीं | he performed |
| बहु | अनेक | many |
| माया | मायाएँ; जादुई छल | magical illusions |
| जीति | जीता | overcome |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | could be |
| प्रभंजन | पवनदेव का | of the wind-god |
| जाया | पुत्र हनुमान | son, Hanuman |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 732
- सहायक विषय
- हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 731, 732
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।