सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आजु सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा। सुनत बचन कह पवनकुमारा।।
मूल पाठ
आजु सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा। सुनत बचन कह पवनकुमारा।।
राम काजु करि फिरि मैं आवौं। सीता कइ सुधि प्रभुहि सुनावौं।।
स्रोत अभिलेख 5.2 · पुस्तक पृ. 715, 716
भावार्थ
मूल पाठ के बादआज देवताओंने मुझे भोजन दिया है। यह वचन सुनकर पवनकुमार हनुमान्जीने कहा—श्रीरामजीका कार्य करके मैं लौट आऊँ और सीताजीकी खबर प्रभुको सुना दूँ,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 715 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आजु सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा। सुनत बचन कह पवनकुमारा।।
English explanation
“Today the gods have given you to me as food.” Hearing these words, Hanuman, son of the wind god, spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आजु | आज | today |
| सुरन्ह | देवताओं ने | the gods |
| मोहि | मुझे | to me |
| दीन्ह | दिया | gave |
| अहारा | भोजन | food |
| सुनत | सुनकर | on hearing |
| बचन | वचन | the words |
| कह | बोले | said |
| पवनकुमारा | पवनदेव के पुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
2 राम काजु करि फिरि मैं आवौं। सीता कइ सुधि प्रभुहि सुनावौं।।
English explanation
“I will return after completing Rama’s task and reporting news of Sita to my lord.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम का | Rama’s |
| काजु | कार्य | task |
| करि | करके | having done |
| फिरि | फिर, लौटकर | back, again |
| मैं | मैं | I |
| आवौं | आऊँगा | will come |
| सीता | राम की पत्नी सीता | Sita, Rama’s wife |
| कइ | की | of |
| सुधि | खबर, कुशल-समाचार | news, tidings |
| प्रभुहि | प्रभु राम को | to my lord Rama |
| सुनावौं | सुनाऊँगा | will report |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 715
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका लङ्काको प्रस्थान, सुरसासे भेंट, छाया पकड़नेवाली राक्षसीका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 715, 716
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।