सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस प्रभु छाड़ि भजहिं जे आना। ते नर पसु बिनु पूँछ बिषाना।।
मूल पाठ
अस प्रभु छाड़ि भजहिं जे आना। ते नर पसु बिनु पूँछ बिषाना।।
निज जन जानि ताहि अपनावा। प्रभु सुभाव कपि कुल मन भावा।।
स्रोत अभिलेख 5.5 · पुस्तक पृ. 759, 760
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसे परम कृपालु प्रभुको छोड़कर जो मनुष्य दूसरेको भजते हैं, वे बिना सींग-पूँछके पशु हैं। अपना सेवक जानकर विभीषणको श्रीरामजीने अपना लिया। प्रभुका स्वभाव वानरकुलके मनको [बहुत] भाया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 759 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अस प्रभु छाड़ि भजहिं जे आना। ते नर पसु बिनु पूँछ बिषाना।।
English explanation
AI-generated explanatory draft: Those who forsake such a Lord and worship others are human beings who are like animals without tails or horns.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसे | such |
| प्रभु | प्रभु राम को | Lord Rama |
| छाड़ि | छोड़कर | having forsaken |
| भजहिं | भजते हैं | worship |
| जे | जो लोग | those who |
| आना | दूसरों को | others |
| ते | वे | those |
| नर | मनुष्य | human beings |
| पसु | पशु | animals |
| बिनु | बिना | without |
| पूँछ | पूँछ | tails |
| बिषाना | सींग | horns |
2 निज जन जानि ताहि अपनावा। प्रभु सुभाव कपि कुल मन भावा।।
English explanation
The Lord accepted him as his own servant. This disposition of the Lord pleased the community of monkeys.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपना | his own |
| जन | सेवक या भक्त | servant or devotee |
| जानि | जानकर | recognizing as |
| ताहि | उसे, विभीषण को | him, Vibhishana |
| अपनावा | अपना लिया | accepted as his own |
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
| सुभाव | स्वभाव | disposition |
| कपि | वानरों के | of monkeys |
| कुल | समुदाय | community |
| मन | मन को | to the hearts |
| भावा | अच्छा लगा | was pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 759
- सहायक विषय
- समुद्र पार करनेके लिये विचार, रावणदूत शुकका आना और लक्ष्मणजीके पत्रको लेकर लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 759, 760
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।