सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति कोमल रघुबीर सुभाऊ। जद्यपि अखिल लोक कर राऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयद्यपि श्रीरघुवीर समस्त लोकोंके स्वामी हैं, पर उनका स्वभाव अत्यन्त ही कोमल है। मिलते ही प्रभु आपपर कृपा करेंगे और आपका एक भी अपराध वे हृदयमें नहीं रखेंगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 765 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अति कोमल रघुबीर सुभाऊ। जद्यपि अखिल लोक कर राऊ।।
मिलत कृपा तुम्ह पर प्रभु करिही। उर अपराध न एकउ धरिही।।
स्रोत अभिलेख 5.57 · पुस्तक पृ. 765, 766
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अति कोमल रघुबीर सुभाऊ। जद्यपि अखिल लोक कर राऊ।।
English explanation
Rama, the hero of Raghu's lineage, has a very gentle nature, although he is king of all the worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | very |
| कोमल | कोमल; सौम्य | gentle |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu's lineage |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| अखिल | समस्त | all |
| लोक | लोकों | worlds |
| कर | के | of |
| राऊ | राजा | king |
2 मिलत कृपा तुम्ह पर प्रभु करिही। उर अपराध न एकउ धरिही।।
English explanation
Upon meeting you, the Lord will show you grace and will hold not even one of your offenses in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिलत | मिलते ही | upon meeting |
| कृपा | कृपा | grace |
| तुम्ह | तुम | you |
| पर | पर | upon |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| करिही | करेंगे | will bestow |
| उर | हृदय में | in his heart |
| अपराध | अपराध | offense |
| न | नहीं | not |
| एकउ | एक भी | even one |
| धरिही | रखेंगे | will retain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 765
- सहायक विषय
- दूतका रावणको समझाना और लक्ष्मणजीका पत्र देना
- मुद्रित पृष्ठ
- 765, 766
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।