लङ्काकाण्ड · सोरठा · सोरठा
सिंधु बचन सुनि राम सचिव बोलि प्रभु अस कहेउ।
मूल पाठ
सिंधु बचन सुनि राम सचिव बोलि प्रभु अस कहेउ।
अब बिलंबु केहि काम करहु सेतु उतरै कटकु॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 771, 772
भावार्थ
मूल पाठ के बादसमुद्रके वचन सुनकर प्रभु श्रीरामजीने मन्त्रियोंको बुलाकर ऐसा कहा—अब विलम्ब किसलिये हो रहा है? सेतु (पुल) तैयार करो, जिसमें सेना उतरे।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 772 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सिंधु बचन सुनि राम सचिव बोलि प्रभु अस कहेउ।
English explanation
Having heard the ocean’s words, Lord Rama summoned his counsellors and spoke thus.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिंधु | समुद्र के | of the ocean |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| राम | राम ने | Rama |
| सचिव | मंत्रियों को | the counsellors |
| बोलि | बुलाकर | having summoned |
| प्रभु | प्रभु ने | the Lord |
| अस | ऐसा; इस प्रकार | thus; as follows |
| कहेउ | कहा | said |
2अब बिलंबु केहि काम करहु सेतु उतरै कटकु॥
English explanation
What purpose does delay serve now? Build a bridge so that the army may cross.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| बिलंबु | विलंब; देरी | delay |
| केहि | किस | what; which |
| काम | काम का; प्रयोजन का | purpose; use |
| करहु | बनाओ | build |
| सेतु | पुल | a bridge |
| उतरै | पार उतर सके | may cross over |
| कटकु | सेना | the army |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- सोरठा
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 772
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 771, 772
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।