लङ्काकाण्ड · दोहा · दोहा/सोरठा
सुनहु भानुकुल केतु जामवंत कर जोरि कह।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजाम्बवान्ने हाथ जोड़कर कहा—हे सूर्यकुलके ध्वजा-स्वरूप (कीर्तिको बढ़ानेवाले) श्रीरामजी! सुनिये। हे नाथ! [सबसे बड़ा] सेतु तो आपका नाम ही है, जिसपर चढ़कर (जिसका आश्रय लेकर) मनुष्य संसाररूपी समुद्रसे पार हो जाते हैं।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 772 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनहु भानुकुल केतु जामवंत कर जोरि कह।
नाथ नाम तव सेतु नर चढ़ि भव सागर तरहिं॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 771, 772
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनहु भानुकुल केतु जामवंत कर जोरि कह।
English explanation
With folded hands, Jambavan says, “Listen, O Rama, banner of the solar dynasty.” (This interpretation is an AI draft.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनिए | please listen |
| भानुकुल | सूर्यवंश के | of the solar dynasty |
| केतु | पताका स्वरूप गौरव, हे राम | banner and glory, O Rama |
| जामवंत | जामवंत, राम के रीछ-वीर सहयोगी | Jambavan, Rama’s bear-warrior ally |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | having joined |
| कह | कहते हैं | says |
2नाथ नाम तव सेतु नर चढ़ि भव सागर तरहिं॥
English explanation
“O Lord, your name is a bridge; by taking that bridge, people cross the ocean of worldly existence.” (This interpretation is an AI draft.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| नाम | नाम | name |
| तव | आपका | your |
| सेतु | पुल | bridge |
| नर | मनुष्य | people |
| चढ़ि | चढ़कर | having mounted it |
| भव | सांसारिक अस्तित्व का | of worldly existence |
| सागर | समुद्र | ocean |
| तरहिं | पार कर जाते हैं | cross over |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 772
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 771, 772
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।