लङ्काकाण्ड · दोहा 121 (क) · दोहा
समर बिजय रघुबीर के चरित जे सुनहिं सुजान।
समर बिजय रघुबीर के चरित जे सुनहिं सुजान।
बिजय बिबेक बिभूति नित तिन्हहि देहिं भगवान॥ १२१ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.121 · पुस्तक पृ. 901, 902
भावार्थ और शब्दार्थ
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1समर बिजय रघुबीर के चरित जे सुनहिं सुजान।
जो सुजान लोग रघुवीर राम की युद्ध-विजय के चरित सुनते हैं—
English explanation
Those discerning people who hear the accounts of Rama’s victory in battle—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समर | युद्ध में | in battle |
| बिजय | विजय | victory |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| के | के | of |
| चरित | कर्मों की कथाएँ | accounts of deeds |
| जे | जो लोग | those who |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen to |
| सुजान | समझदार लोग | discerning people |
2बिजय बिबेक बिभूति नित तिन्हहि देहिं भगवान॥ १२१ (क)॥
भगवान उन्हें नित्य विजय, विवेक और ऐश्वर्य देते हैं।
English explanation
The Lord continually grants them victory, discernment and prosperity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिजय | विजय | victory |
| बिबेक | विवेक | discernment |
| बिभूति | ऐश्वर्य, समृद्धि | prosperity and distinction |
| नित | नित्य | continually |
| तिन्हहि | उन्हीं को | to those very people |
| देहिं | देते हैं | grants |
| भगवान | भगवान राम | the Lord Rama |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 121 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.121
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान · श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 901, 902
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