लङ्काकाण्ड · दोहा 30 · दोहा/सोरठा
तोहि पटकि महि सेन हति चौपट करि तव गाउँ।
तोहि पटकि महि सेन हति चौपट करि तव गाउँ।
तव जुबतिन्ह समेत सठ जनकसुतहि लै जाउँ।।30।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.3 · पुस्तक पृ. 800, 801
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तोहि पटकि महि सेन हति चौपट करि तव गाउँ।
तुझे धरती पर पटककर, तेरी सेना को मारकर और तेरी नगरी को उजाड़कर—
English explanation
Having hurled you to the ground, slain your army, and laid waste to your city—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तोहि | तुझे | you |
| पटकि | पटककर | having hurled down |
| महि | धरती पर | to the ground |
| सेन | सेना को | the army |
| हति | मारकर | having slain |
| चौपट | उजाड़; नष्ट | ruined; devastated |
| करि | करके | having made |
| तव | तेरी | your |
| गाउँ | नगरी; बस्ती | city; settlement |
2 तव जुबतिन्ह समेत सठ जनकसुतहि लै जाउँ।।30।।
हे मूर्ख, तेरी स्त्रियों सहित जनक की पुत्री सीता को लेकर चला जाता।
English explanation
Fool, I would take Janaka’s daughter Sita away, together with your women.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | तेरी | your |
| जुबतिन्ह | युवतियों; स्त्रियों के | young women; women |
| समेत | सहित | together with |
| सठ | हे मूर्ख | O fool |
| जनकसुतहि | जनक की पुत्री सीता को | Sita, daughter of Janaka |
| लै | लेकर | taking |
| जाउँ | मैं चला जाता | I would go away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 30
- स्रोत अभिलेख
- 6.3
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 800, 801
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