लङ्काकाण्ड · दोहा 29 · दोहा/सोरठा
जरहिं पतंग मोह बस भार बहहिं खर बृंद।
जरहिं पतंग मोह बस भार बहहिं खर बृंद।
ते नहिं सूर कहावहिं समुझि देखु मतिमंद।।29।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.29 · पुस्तक पृ. 799, 800
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जरहिं पतंग मोह बस भार बहहिं खर बृंद।
पतंगे मोह के वश होकर जलते हैं और गधों के झुंड बोझ ढोते हैं।
English explanation
Moths burn under the sway of delusion, and herds of donkeys carry burdens.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जरहिं | जलते हैं | burn |
| पतंग | पतंगे | moths |
| मोह | मोह के | of delusion |
| बस | वश में | under the sway |
| भार | बोझ | burdens |
| बहहिं | ढोते हैं | carry |
| खर | गधों के | of donkeys |
| बृंद | झुंड | herds |
2 ते नहिं सूर कहावहिं समुझि देखु मतिमंद।।29।।
वे वीर नहीं कहलाते; हे मंदबुद्धि, सोचकर देख!
English explanation
They are not called heroes; think it over, dull-witted one!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | they |
| नहिं | नहीं | not |
| सूर | वीर | heroes |
| कहावहिं | कहलाते हैं | are called |
| समुझि | समझकर | reflecting |
| देखु | देख | consider |
| मतिमंद | हे मंदबुद्धि | you dull-witted one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 29
- स्रोत अभिलेख
- 6.29
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 799, 800
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