लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
स्याम गात राजीव बिलोचन। दीन बंधु प्रनतारति मोचन।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे श्यामसुन्दर-शरीर! हे कमलनयन! हे दीनबन्धु! हे शरणागतको दु:खसे छुड़ानेवाले! हे राजा रामचन्द्रजी! आप छोटे भाई लक्ष्मण और जानकीजीसहित निरन्तर मेरे हृदयके अंदर निवास कीजिये। आप मुनियोंको आनन्द देनेवाले, पृथ्वीमण्डलके भूषण, तुलसीदासके प्रभु और भयका नाश करनेवाले हैं॥ ४-५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 895 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
स्याम गात राजीव बिलोचन। दीन बंधु प्रनतारति मोचन।।
अनुज जानकी सहित निरंतर। बसहु राम नृप मम उर अंतर।।4।।
मुनि रंजन महि मंडल मंडन। तुलसिदास प्रभु त्रास बिखंडन।।5।।
स्रोत अभिलेख 6.115 · पुस्तक पृ. 895, 895
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 स्याम गात राजीव बिलोचन। दीन बंधु प्रनतारति मोचन।।
English explanation
Your body is dark-hued and your eyes are like lotuses. You are the friend of the lowly and the remover of the suffering of those who seek refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्याम | श्याम वर्ण का | dark-hued |
| गात | शरीर | body |
| राजीव | कमल के समान | lotus-like |
| बिलोचन | नेत्र | eyes |
| दीन | दीनों के | of the lowly |
| बंधु | मित्र और सहायक | friend and helper |
| प्रनतारति | शरणागतों की पीड़ा | the suffering of those seeking refuge |
| मोचन | दूर करने वाले | remover |
2 अनुज जानकी सहित निरंतर। बसहु राम नृप मम उर अंतर।।4।।
English explanation
O King Rama, dwell forever within my heart together with your younger brother Lakshmana and Janaki.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | your younger brother Lakshmana |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| सहित | के साथ | together with |
| निरंतर | सदा | forever |
| बसहु | निवास कीजिए | please dwell |
| राम | हे राम | O Rama |
| नृप | हे राजा | O king |
| मम | मेरे | my |
| उर | हृदय के | of the heart |
| अंतर | भीतर | within |
3 मुनि रंजन महि मंडल मंडन। तुलसिदास प्रभु त्रास बिखंडन।।5।।
English explanation
You delight the sages and adorn the earth. O Lord of Tulsidas, you are the destroyer of fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों को | the sages |
| रंजन | आनंद देने वाले | one who delights |
| महि | पृथ्वी | earth |
| मंडल | मंडल, समूचा क्षेत्र | the whole realm |
| मंडन | भूषण | adornment |
| तुलसिदास | कवि तुलसिदास के | of the poet Tulsidas |
| प्रभु | हे स्वामी | O Lord |
| त्रास | भय | fear |
| बिखंडन | नाश करने वाले | destroyer |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 895
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 895, 895
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।