लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
संधानि धनु सर निकर छाड़ेसि उरग जिमि उड़ि लागहीं।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउसने धनुषपर सन्धान करके बाणोंके समूह छोड़े। वे बाण सर्पकी तरह उड़कर जा लगते थे। पृथ्वी-आकाश और दिशा-विदिशा सर्वत्र बाण भर रहे हैं। वानर भागें तो कहाँ? अत्यन्त कोलाहल मच गया। वानर-भालुओंकी सेना व्याकुल होकर आत्र्त पुकार करने लगी—हे रघुवीर! हे करुणासागर! हे पीडि़तोंके बन्धु! हे सेवकोंकी रक्षा करके उनके दु:ख हरनेवाले हरि!
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 854 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
संधानि धनु सर निकर छाड़ेसि उरग जिमि उड़ि लागहीं।
रहे पूरि सर धरनी गगन दिसि बिदिसि कहँ कपि भागहीं॥
भयो अति कोलाहल बिकल कपि दल भालु बोलहिं आतुरे।
रघुबीर करुना सिं धु आरत बंधु जन रच्छक हरे॥
स्रोत अभिलेख 6.82 · पुस्तक पृ. 853, 853
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1संधानि धनु सर निकर छाड़ेसि उरग जिमि उड़ि लागहीं।
English explanation
He readied his bow and released volleys of arrows; they flew and struck like serpents.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संधानि | साधकर | having readied |
| धनु | धनुष | the bow |
| सर | बाणों का | of arrows |
| निकर | समूह | volleys |
| छाड़ेसि | उसने छोड़े | he released |
| उरग | साँप | serpents |
| जिमि | की तरह | like |
| उड़ि | उड़कर | flying |
| लागहीं | लगते हैं | strike |
2रहे पूरि सर धरनी गगन दिसि बिदिसि कहँ कपि भागहीं॥
English explanation
Arrows filled the earth, sky, and every direction and intermediate quarter; where could the monkeys flee?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहे | रहे थे | remained |
| पूरि | भरकर | filling |
| सर | बाण | arrows |
| धरनी | धरती | the earth |
| गगन | आकाश | the sky |
| दिसि | दिशाएँ | the cardinal directions |
| बिदिसि | विदिशाएँ | the intermediate directions |
| कहँ | कहाँ | where |
| कपि | वानर | the monkeys |
| भागहीं | भागें | could flee |
3भयो अति कोलाहल बिकल कपि दल भालु बोलहिं आतुरे।
English explanation
A great uproar arose. The distressed monkey troops and bears cried out in agitation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयो | हुआ | arose |
| अति | बहुत | great |
| कोलाहल | कोलाहल | uproar |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| कपि | वानरों का | of monkeys |
| दल | दल | troops |
| भालु | भालू | bears |
| बोलहिं | पुकारते हैं | cry out |
| आतुरे | आतुर होकर | in agitation |
4रघुबीर करुना सिं धु आरत बंधु जन रच्छक हरे॥
English explanation
O Rama, hero of Raghu’s line, ocean of compassion, friend of the distressed, protector of your people, O Hari! (‘सिं धु’ is interpreted as a likely split form of ‘सिंधु,’ meaning ocean.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुबीर | हे रघुवंश के वीर राम | O Rama, hero of Raghu’s line |
| करुना | करुणा के | of compassion |
| सिं | सागर—‘सिंधु’ का पहला अंश; यहाँ करुणा का सागर। | Ocean—the first fragment of ‘सिंधु’; here, an ocean of compassion. |
| धु | सागर—‘सिंधु’ का अंतिम अंश; यहाँ करुणा का सागर। | Ocean—the final fragment of ‘सिंधु’; here, an ocean of compassion. |
| आरत | दुखियों के | of the distressed |
| बंधु | बंधु | friend |
| जन | अपने जनों के | of your people |
| रच्छक | रक्षक | protector |
| हरे | हे हरि | O Hari |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.82
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 854
- सहायक विषय
- रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 853, 853
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।