लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
संग्राम भूमि बिराज रघुपति अतुल बल कोसल धनी।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअतुलनीय बलवाले कोसलपति श्रीरघुनाथजी रणभूमिमें सुशोभित हैं। मुखपर पसीनेकी बूँदें हैं, कमलके समान नेत्र कुछ लाल हो रहे हैं। शरीरपर रक्तके कण हैं, दोनों हाथोंसे धनुष-बाण फिरा रहे हैं। चारों ओर रीछ-वानर सुशोभित हैं। तुलसीदासजी कहते हैं कि प्रभुकी इस छबिका वर्णन शेषजी भी नहीं कर सकते जिनके बहुत-से (हजार) मुख हैं।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 840 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
संग्राम भूमि बिराज रघुपति अतुल बल कोसल धनी।
श्रम बिंदु मुख राजीव लोचन अरुन तन सोनित कनी॥
भुज जुगल फेरत सर सरासन भालु कपि चहु दिसि बने।
कह दास तुलसी कहि न सक छबि सेष जेहि आनन घने॥
स्रोत अभिलेख 6.71 · पुस्तक पृ. 839, 840
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1संग्राम भूमि बिराज रघुपति अतुल बल कोसल धनी।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Rama, lord of Raghu’s line and ruler of Kosala, stands resplendent on the battlefield, possessing incomparable strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संग्राम | युद्ध | battle |
| भूमि | भूमि; यहाँ युद्ध का मैदान | ground; here, the battlefield |
| बिराज | विराज रहे हैं | stand resplendent |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of Raghu’s line |
| अतुल | जिसकी तुलना न हो | incomparable |
| बल | शक्ति | strength |
| कोसल | कोसल राज्य के | of the kingdom of Kosala |
| धनी | स्वामी | lord and ruler |
2श्रम बिंदु मुख राजीव लोचन अरुन तन सोनित कनी॥
English explanation
Drops of perspiration from exertion lie on his face; his lotus-like eyes are reddish, and tiny drops of blood mark his body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रम | परिश्रम से उत्पन्न पसीने के | of perspiration caused by exertion |
| बिंदु | बूँदें | drops |
| मुख | मुख पर | on the face |
| राजीव | कमल-जैसे | lotus-like |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| अरुन | लालिमा लिए हुए | reddish |
| तन | शरीर पर | on the body |
| सोनित | रक्त की | of blood |
| कनी | छोटी बूँदें | tiny drops |
3भुज जुगल फेरत सर सरासन भालु कपि चहु दिसि बने।
English explanation
He wields arrow and bow with his two arms; bears and monkeys stand arrayed on all four sides.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भुज | भुजाएँ | arms |
| जुगल | दोनों; जोड़ी | the pair; both |
| फेरत | चला रहे हैं | wielding |
| सर | बाण | arrow |
| सरासन | धनुष | bow |
| भालु | भालू योद्धा | bear warriors |
| कपि | वानर योद्धा | monkey warriors |
| चहु | चारों | all four |
| दिसि | दिशाओं में | on the sides; in the directions |
| बने | शोभायमान होकर खड़े हैं | stand arrayed resplendently |
4कह दास तुलसी कहि न सक छबि सेष जेहि आनन घने॥
English explanation
The servant Tulsi says that even Shesha, who has many mouths, cannot describe this splendor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहते हैं | says |
| दास | सेवक; कवि का विनम्र आत्मपरिचय | servant; the poet’s humble self-description |
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| कहि | कह; वर्णन कर | express; describe |
| न | नहीं | not |
| सक | सकते | can |
| छबि | शोभा; सुंदर रूप | splendor; beautiful appearance |
| सेष | अनेक मुखों वाले शेषनाग | Shesha, the many-mouthed serpent |
| जेहि | जिनके | whose; who has |
| आनन | मुख | mouths |
| घने | अनेक | many |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 840
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 839, 840
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।