लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
लंकेस अति बल गर्ब। किए बस्य सुर गंधर्ब।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दलंकापति रावणको अपने बलका बहुत घमंड था। उसने देवता और गन्धर्व सभीको अपने वशमें कर लिया था और वह मुनि, सिद्ध, मनुष्य, पक्षी और नाग आदि सभीके हठपूर्वक (हाथ धोकर) पीछे पड़ गया था॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 893 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लंकेस अति बल गर्ब। किए बस्य सुर गंधर्ब।।
मुनि सिद्ध नर खग नाग। हठि पंथ सब कें लाग।।4।।
स्रोत अभिलेख 6.113 · पुस्तक पृ. 892, 893
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लंकेस अति बल गर्ब। किए बस्य सुर गंधर्ब।।
English explanation
Ravana, lord of Lanka, was exceedingly proud of his strength; he had subdued the gods and celestial musicians.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लंकेस | लंका का स्वामी रावण | Ravana, lord of Lanka |
| अति | अत्यधिक | exceedingly |
| बल | अपने बल का | of his strength |
| गर्ब | गर्व; घमंड | pride; arrogance |
| किए | कर लिया था | had made |
| बस्य | अपने अधीन | subject to himself |
| सुर | देवताओं को | the gods |
| गंधर्ब | गंधर्वों को; दिव्य गायकों को | the celestial musicians |
2 मुनि सिद्ध नर खग नाग। हठि पंथ सब कें लाग।।4।।
English explanation
He obstinately obstructed the paths of sages, perfected beings, humans, birds, and serpent beings alike.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों; तपस्वियों | sages; ascetics |
| सिद्ध | सिद्धि-प्राप्त प्राणियों | perfected beings |
| नर | मनुष्यों | humans |
| खग | पक्षियों | birds |
| नाग | नागों; सर्पजातीय प्राणियों | serpents; serpent beings |
| हठि | हठपूर्वक; बलपूर्वक | obstinately; forcibly |
| पंथ | मार्ग में | in the path |
| सब | सभी | all |
| कें | के | of |
| लाग | अड़ता; बाधा डालता था | stood in the way; obstructed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 893
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 892, 893
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