लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
परद्रोह रत अति दुष्ट। पायो सो फलु पापिष्ट।।
मूल पाठ
परद्रोह रत अति दुष्ट। पायो सो फलु पापिष्ट।।
अब सुनहु दीन दयाल। राजीव नयन बिसाल।।5।।
स्रोत अभिलेख 6.113 · पुस्तक पृ. 892, 893
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह दूसरोंसे द्रोह करनेमें तत्पर और अत्यन्त दुष्ट था। उस पापीने वैसा ही फल पाया। अब हे दीनोंपर दया करनेवाले! हे कमलके समान विशाल नेत्रोंवाले! सुनिये॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 893 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परद्रोह रत अति दुष्ट। पायो सो फलु पापिष्ट।।
English explanation
That utterly wicked sinner, intent on harming others, received the fruit of his deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परद्रोह | दूसरों का अहित करने में | in harming others |
| रत | लगा हुआ | engaged; intent |
| अति | अत्यंत | extremely |
| दुष्ट | दुष्ट | wicked |
| पायो | पाया; प्राप्त किया | received; obtained |
| सो | उसने; उस | that one; he |
| फलु | कर्म का परिणाम | fruit; consequence |
| पापिष्ट | महापापी | deeply sinful one |
2 अब सुनहु दीन दयाल। राजीव नयन बिसाल।।5।।
English explanation
Now listen, O compassionate Lord of the lowly, whose large eyes are like lotuses!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| सुनहु | सुनिए | please listen |
| दीन | दीनों के प्रति | toward the lowly |
| दयाल | दयालु | compassionate |
| राजीव | कमल-समान | lotus-like |
| नयन | नेत्र | eyes |
| बिसाल | बड़े; विशाल | large; expansive |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 893
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 892, 893
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