लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
मोहि रहा अति अभिमान। नहिं कोउ मोहि समान।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमुझे अत्यन्त अभिमान था कि मेरे समान कोई नहीं है, पर अब प्रभु (आप) के चरणकमलोंके दर्शन करनेसे दु:ख-समूहका देनेवाला मेरा वह अभिमान जाता रहा॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 893 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मोहि रहा अति अभिमान। नहिं कोउ मोहि समान।।
अब देखि प्रभु पद कंज। गत मान प्रद दुख पुंज।।6।।
स्रोत अभिलेख 6.113 · पुस्तक पृ. 892, 893
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मोहि रहा अति अभिमान। नहिं कोउ मोहि समान।।
English explanation
I was very proud, thinking that no one was my equal.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझे; मुझमें | in me; I had |
| रहा | था; बना हुआ था | was; persisted |
| अति | बहुत | great; much |
| अभिमान | अहंकार | pride; conceit |
| नहिं | नहीं | not |
| कोउ | कोई | anyone |
| मोहि | मेरे | to me; my |
| समान | बराबर | equal |
2 अब देखि प्रभु पद कंज। गत मान प्रद दुख पुंज।।6।।
English explanation
Now, seeing the Lord’s lotus feet, my pride—which brought heaps of sorrow—has vanished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| देखि | देखकर | having seen |
| प्रभु | प्रभु के | of the Lord |
| पद | चरण | feet |
| कंज | कमल; कमल-समान | lotus; lotus-like |
| गत | चला गया; मिट गया | gone; vanished |
| मान | अभिमान | pride |
| प्रद | देने वाला | causing; giving |
| दुख | दुखों का | of sorrows |
| पुंज | ढेर; समूह | heap; multitude |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 893
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 892, 893
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।