लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
कोउ ब्रह्म निर्गुन ध्याव। अब्यक्त जेहि श्रुति गाव।।
मूल पाठ
कोउ ब्रह्म निर्गुन ध्याव। अब्यक्त जेहि श्रुति गाव।।
मोहि भाव कोसल भूप। श्रीराम सगुन सरूप।।7।।
स्रोत अभिलेख 6.113 · पुस्तक पृ. 892, 893
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोई उन निर्गुन ब्रह्मका ध्यान करते हैं जिन्हें वेद अव्यक्त (निराकार) कहते हैं। परन्तु हे रामजी! मुझे तो आपका यह सगुण कोसलराज-स्वरूप ही प्रिय लगता है॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 893 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कोउ ब्रह्म निर्गुन ध्याव। अब्यक्त जेहि श्रुति गाव।।
English explanation
Let others meditate on the attributeless Absolute, whom the Vedas praise as unmanifest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोउ | कोई; कोई अन्य | someone; others |
| ब्रह्म | परम सत्य; ब्रह्म | the Absolute; ultimate reality |
| निर्गुन | गुणों से रहित | without attributes |
| ध्याव | ध्यान करे | may meditate on |
| अब्यक्त | अप्रकट | unmanifest |
| जेहि | जिसे | whom; which |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| गाव | गाते; वर्णन करते हैं | sing of; describe |
2 मोहि भाव कोसल भूप। श्रीराम सगुन सरूप।।7।।
English explanation
For me, the manifest form endowed with attributes—Shri Rama, king of Kosala—is dear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझे | to me |
| भाव | प्रिय लगता है | is pleasing; is dear |
| कोसल | कोसल देश के | of Kosala |
| भूप | राजा | king |
| श्रीराम | पूज्य राम | the revered Rama |
| सगुन | गुणों सहित; साकार | endowed with attributes; manifest |
| सरूप | स्वरूप; रूप | form |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 893
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 892, 893
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