लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
माया बिगत कपि भालु हरषे बिटप गिरि गहि सब फिरे।
मूल पाठ
माया बिगत कपि भालु हरषे बिटप गिरि गहि सब फिरे।
सर निकर छाड़े राम रावन बाहु सिर पुनि महि गिरे।।
श्रीराम रावन समर चरित अनेक कल्प जो गावहीं।
सत सेष सारद निगम कबि तेउ तदपि पार न पावहीं।।2।।
स्रोत अभिलेख 6.101 · पुस्तक पृ. 876, 878
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाया दूर हो जानेपर वानर-भालू हर्षित हुए और वृक्ष तथा पर्वत ले-लेकर सब लौट पड़े। श्रीरामजीने बाणोंके समूह छोड़े, जिनसे रावणके हाथ और सिर फिर कट-कटकर पृथ्वीपर गिर पड़े। श्रीरामजी और रावणके युद्धका चरित्र यदि सैकड़ों शेष, सरस्वती, वेद और कवि अनेक कल्पोंतक गाते रहें, तो भी वे उसका पार नहीं पा सकते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 878 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 माया बिगत कपि भालु हरषे बिटप गिरि गहि सब फिरे।
English explanation
When the illusion vanished, the monkeys and bears rejoiced; all returned carrying trees and mountains.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| माया | मायावी भ्रम | illusion |
| बिगत | दूर होने पर | having vanished |
| कपि | वानर | monkeys |
| भालु | भालू | bears |
| हरषे | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| बिटप | वृक्ष | trees |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| गहि | पकड़कर | grasping |
| सब | सभी | all |
| फिरे | लौटे | returned |
2 सर निकर छाड़े राम रावन बाहु सिर पुनि महि गिरे।।
English explanation
Rama released a volley of arrows; Ravana’s arms and heads fell to the earth again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सर | बाणों का | of arrows |
| निकर | समूह, झड़ी | a volley |
| छाड़े | छोड़े | released |
| राम | राम ने | Rama |
| रावन | रावण की | Ravana’s |
| बाहु | भुजाएँ | arms |
| सिर | सिर | heads |
| पुनि | फिर | again |
| महि | पृथ्वी पर | on the earth |
| गिरे | गिर पड़े | fell |
3 श्रीराम रावन समर चरित अनेक कल्प जो गावहीं।
English explanation
Even if the account of Shri Rama’s battle with Ravana were sung for many cosmic ages—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीराम | श्रीराम का | of revered Rama |
| रावन | रावण के साथ | with Ravana |
| समर | युद्ध | battle |
| चरित | वृत्तांत | account |
| अनेक | अनेक | many |
| कल्प | कल्पों तक, विशाल ब्रह्मांडीय कालों तक | for cosmic ages |
| जो | यदि | if |
| गावहीं | गाएँ | were to sing |
4 सत सेष सारद निगम कबि तेउ तदपि पार न पावहीं।।2।।
English explanation
—even a hundred Sheshas, Sarasvatis, Vedas, and poets would still be unable to reach its end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत | सौ | a hundred |
| सेष | शेषनाग, बहुमुखी नागराज | Shesha, the many-headed serpent king |
| सारद | सरस्वती, वाणी की देवी | Sarasvati, goddess of speech |
| निगम | वेद | the Vedas |
| कबि | कवि | poets |
| तेउ | वे भी | even they |
| तदपि | तो भी | nevertheless |
| पार | अंत, पूर्ण सीमा | the end, full extent |
| न | नहीं | not |
| पावहीं | पा सकेंगे | could reach |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 878
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 876, 878
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।