लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
भए क्रुद्ध जुद्ध बिरुद्ध रघुपति त्रोन सायक कसमसे।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयुद्धमें शत्रुके विरुद्ध श्रीरघुनाथजी क्रोधित हुए, तब तरकसमें बाण कसमसाने लगे (बाहर निकलनेको आतुर होने लगे)। उनके धनुषका अत्यन्त प्रचण्ड शब्द (टङ्कार) सुनकर मनुष्यभक्षी सब राक्षस वातग्रस्त हो गये (अत्यन्त भयभीत हो गये)। मन्दोदरीका हृदय काँप उठा; समुद्र, कच्छप, पृथ्वी और पर्वत डर गये। दिशाओंके हाथी पृथ्वीको दाँतोंसे पकड़कर चिग्घाडऩे लगे। यह कौतुक देखकर देवता हँसे।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 864 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भए क्रुद्ध जुद्ध बिरुद्ध रघुपति त्रोन सायक कसमसे।
कोदंड धुनि अति चंड सुनि मनुजाद सब मारुत ग्रसे॥
मंदोदरी उर कंप कंपति कमठ भू भूधर त्रसे।
चिक्करहिं दिग्गज दसन गहि महि देखि कौतुक सुर हँसे॥
स्रोत अभिलेख 6.91 · पुस्तक पृ. 864, 864
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1भए क्रुद्ध जुद्ध बिरुद्ध रघुपति त्रोन सायक कसमसे।
English explanation
AI draft: Facing opposition in battle, Rama grew angry; the arrows in his quiver began to stir.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| क्रुद्ध | क्रोधित | angry |
| जुद्ध | युद्ध में | in battle |
| बिरुद्ध | विरोध का सामना करते हुए | facing opposition |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu's lineage |
| त्रोन | तरकस में | in the quiver |
| सायक | बाण | arrows |
| कसमसे | कसमसाने लगे | began to stir restlessly |
2कोदंड धुनि अति चंड सुनि मनुजाद सब मारुत ग्रसे॥
English explanation
Hearing the exceedingly fierce twang of the bow, all the man-eating demons held their breath in terror.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोदंड | राम के धनुष की | of Rama's bow |
| धुनि | टंकार | twang |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| चंड | प्रचंड | fierce |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मनुजाद | मनुष्यों को खाने वाले राक्षस | man-eating demons |
| सब | सभी | all |
| मारुत | वायु अर्थात् साँस | air, here breath |
| ग्रसे | निगल गए; साँस रोक ली | swallowed; held their breath |
3मंदोदरी उर कंप कंपति कमठ भू भूधर त्रसे।
English explanation
Mandodari's heart trembled; the earth-supporting tortoise and the earth shook, and the mountains were frightened.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंदोदरी | रावण की पत्नी मंदोदरी के | of Mandodari, Ravana's wife |
| उर | हृदय में | in the heart |
| कंप | कंपन हुआ | there was trembling |
| कंपति | काँपने लगे | began to tremble |
| कमठ | पृथ्वीधारक कच्छप | the earth-supporting tortoise |
| भू | पृथ्वी | the earth |
| भूधर | पर्वत | mountains |
| त्रसे | भयभीत हुए | were frightened |
4चिक्करहिं दिग्गज दसन गहि महि देखि कौतुक सुर हँसे॥
English explanation
The elephants of the directions trumpeted, gripping the earth with their tusks; seeing this remarkable spectacle, the gods laughed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चिक्करहिं | चिंघाड़ते हैं | trumpet |
| दिग्गज | दिशाओं को धारण करने वाले हाथी | the elephants supporting the directions |
| दसन | दाँतों से | with their tusks |
| गहि | पकड़कर | gripping |
| महि | पृथ्वी को | the earth |
| देखि | देखकर | having seen |
| कौतुक | अद्भुत दृश्य | the remarkable spectacle |
| सुर | देवता | the gods |
| हँसे | हँसे | laughed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.91
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 864
- सहायक विषय
- इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 864, 864
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।