लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
बिनु कारन दीन दयाल हितं। छबि धाम नमामि रमा सहितं।।
मूल पाठ
बिनु कारन दीन दयाल हितं। छबि धाम नमामि रमा सहितं।।
भव तारन कारन काज परं। मन संभव दारुन दोष हरं।।
स्रोत अभिलेख 6.111 · पुस्तक पृ. 889, 891
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे बिना ही कारण दीनोंपर दया तथा उनका हित करनेवाले और शोभाके धाम! मैं श्रीजानकीजीसहित आपको नमस्कार करता हूँ। आप भवसागरसे तारनेवाले हैं, कारणरूपा प्रकृति और कार्यरूप जगत् दोनोंसे परे हैं और मनसे उत्पन्न होनेवाले कठिन दोषोंको हरनेवाले हैं॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 890 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिनु कारन दीन दयाल हितं। छबि धाम नमामि रमा सहितं।।
English explanation
I bow to Rama together with Rama, his divine consort: the abode of beauty, compassionate to the helpless and their benefactor without any motive or self-interest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| कारन | कारण या स्वार्थ | cause or self-interested motive |
| दीन | दीनों पर | toward the helpless |
| दयाल | दयालु | compassionate |
| हितं | हित करने वाले | benefactor |
| छबि | सुंदरता के | of beauty |
| धाम | धाम | abode |
| नमामि | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow |
| रमा | रमा, लक्ष्मीस्वरूपा सीता | Rama, Lakshmi embodied as Sita |
| सहितं | सहित | together with |
2 भव तारन कारन काज परं। मन संभव दारुन दोष हरं।।
English explanation
You carry beings across worldly existence, transcend cause and effect, and remove terrible faults arising in the mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसार से | worldly existence |
| तारन | पार उतारने वाले | carrying across |
| कारन | कारण | cause |
| काज | कार्य, परिणाम | effect |
| परं | परे | beyond |
| मन | मन में | in the mind |
| संभव | उत्पन्न | arising |
| दारुन | भयंकर | terrible |
| दोष | दोषों को | faults |
| हरं | हरने वाले | removing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 890
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 889, 891
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।