लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
प्रतिमा रुदहिं पबिपात नभ अति बात बह डोलति मही।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमूर्तियाँ रोने लगीं, आकाशसे वज्रपात होने लगे, अत्यन्त प्रचण्ड वायु बहने लगी, पृथ्वी हिलने लगी, बादल रक्त, बाल और धूलकी वर्षा करने लगे। इस प्रकार इतने अधिक अमङ्गल होने लगे कि उनको कौन कह सकता है? अपरिमित उत्पात देखकर आकाशमें देवता व्याकुल होकर जय-जय पुकार उठे। देवताओंको भयभीत जानकर कृपालु श्रीरघुनाथजी धनुषपर बाण सन्धान करने लगे।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 879 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रतिमा रुदहिं पबिपात नभ अति बात बह डोलति मही।
बरषहिं बलाहक रुधिर कच रज असुभ अति सक को कही॥
उतपात अमित बिलोकि नभ सुर बिकल बोलहिं जय जए।
सुर सभय जानि कृपाल रघुपति चाप सर जोरत भए॥
स्रोत अभिलेख 6.102 · पुस्तक पृ. 878, 879
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1प्रतिमा रुदहिं पबिपात नभ अति बात बह डोलति मही।
English explanation
AI draft: Images weep, thunderbolts strike from the sky, a fierce wind blows, and the earth trembles.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रतिमा | प्रतिमाएँ; मूर्तियाँ | images; statues |
| रुदहिं | रोती हैं | weep |
| पबिपात | वज्रपात; बिजली गिरना | thunderbolt strikes |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| अति | अत्यंत; बहुत तेज | exceedingly; fiercely |
| बात | हवा | wind |
| बह | बहती है | blows |
| डोलति | डोलती है; काँपती है | shakes; trembles |
| मही | धरती | the earth |
2बरषहिं बलाहक रुधिर कच रज असुभ अति सक को कही॥
English explanation
Clouds rain blood, hair, and dust. The ominous portents are so many—who can describe them?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरषहिं | बरसाते हैं | rain down |
| बलाहक | बादल | clouds |
| रुधिर | रक्त; खून | blood |
| कच | बाल; केश | hair |
| रज | धूल | dust |
| असुभ | अशुभ उत्पात | ominous portents |
| अति | अत्यधिक | exceedingly many |
| सक | सकता है | can |
| को | कौन | who |
| कही | कहना; वर्णन करना | tell; describe |
3उतपात अमित बिलोकि नभ सुर बिकल बोलहिं जय जए।
English explanation
Seeing countless portents, the gods in the sky anxiously cry, “Victory! Victory!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उतपात | अशुभ उत्पात; अपशकुन | ominous disturbances; portents |
| अमित | असंख्य; अपरिमित | countless; immeasurable |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| सुर | देवता | the gods |
| बिकल | व्याकुल | distressed; anxious |
| बोलहिं | कहते हैं; पुकारते हैं | say; cry out |
| जय | जय हो! | Victory! |
| जए | जय हो! | Victory! |
4सुर सभय जानि कृपाल रघुपति चाप सर जोरत भए॥
English explanation
Knowing the gods to be afraid, compassionate Rama, lord of the Raghu lineage, began fitting arrows to his bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवताओं को | the gods |
| सभय | भयभीत; भय से युक्त | afraid; filled with fear |
| जानि | जानकर | knowing |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| चाप | धनुष पर | to the bow |
| सर | बाण | arrows |
| जोरत | लगाते; चढ़ाते | fitting; nocking |
| भए | लगे | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 879
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 878, 879
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।