लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
धरु मारु बोलहिं घोर। रहि पूरि धुनि चहुँ ओर।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे 'पकड़ो, मारो आदि घोर शब्द बोल रही हैं। चारों ओर (सब दिशाओंमें) यह ध्वनि भर गयी। वे मुख फैलाकर खाने दौड़ती हैं। तब वानर भागने लगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 877 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
धरु मारु बोलहिं घोर। रहि पूरि धुनि चहुँ ओर।।
मुख बाइ धावहिं खान। तब लगे कीस परान।।3।।
स्रोत अभिलेख 6.101 · पुस्तक पृ. 876, 878
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 धरु मारु बोलहिं घोर। रहि पूरि धुनि चहुँ ओर।।
English explanation
They cried fiercely, ‘Seize! Kill!’ Their noise filled every direction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरु | पकड़ो | seize! |
| मारु | मारो | kill! |
| बोलहिं | बोलती हैं | they cry out |
| घोर | भयानक स्वर में | terribly |
| रहि | रही थी | was remaining |
| पूरि | भरकर | filling |
| धुनि | आवाज | noise |
| चहुँ | चारों | all four |
| ओर | दिशाओं में | directions |
2 मुख बाइ धावहिं खान। तब लगे कीस परान।।3।।
English explanation
They rushed with gaping mouths to devour them; then the monkeys began to flee.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुख | मुँह | mouths |
| बाइ | फैलाकर | opening wide |
| धावहिं | दौड़ती हैं | they rush |
| खान | खाने के लिए | to devour |
| तब | तब | then |
| लगे | लगे | began |
| कीस | वानर | monkeys |
| परान | भागने | to flee |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 877
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 876, 878
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।