लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
जहँ जाहिं मर्कट भागि। तहँ बरत देखहिं आगि।।
मूल पाठ
जहँ जाहिं मर्कट भागि। तहँ बरत देखहिं आगि।।
भए बिकल बानर भालु। पुनि लाग बरषै बालु।।4।।
स्रोत अभिलेख 6.101 · पुस्तक पृ. 876, 878
भावार्थ
मूल पाठ के बादवानर भागकर जहाँ भी जाते हैं, वहीं आग जलती देखते हैं। वानर-भालू व्याकुल हो गये। फिर रावण बालू बरसाने लगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 877 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जहँ जाहिं मर्कट भागि। तहँ बरत देखहिं आगि।।
English explanation
Wherever the monkeys fled, they saw fire blazing there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | wherever |
| जाहिं | जाते हैं | they go |
| मर्कट | वानर | monkeys |
| भागि | भागकर | fleeing |
| तहँ | वहाँ | there |
| बरत | जलती हुई | burning |
| देखहिं | देखते हैं | they see |
| आगि | आग | fire |
2 भए बिकल बानर भालु। पुनि लाग बरषै बालु।।4।।
English explanation
The monkeys and bears became distraught; then sand began to rain down.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| बानर | वानर | monkeys |
| भालु | भालू | bears |
| पुनि | फिर | then |
| लाग | लगी | began |
| बरषै | बरसने | to rain down |
| बालु | रेत | sand |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 877
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 876, 878
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