लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
जय कृपा कंद मुकुंद द्वंद हरन सरन सुखप्रद प्रभो।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे कृपाके कन्द! हे मोक्षदाता मुकुन्द! हे [राग-द्वेष, हर्ष-शोक, जन्म-मृत्यु आदि] द्वन्द्वोंके हरनेवाले! हे शरणागतको सुख देनेवाले प्रभो! हे दुष्ट-दलको विदीर्ण करनेवाले! हे कारणोंके भी परम कारण! हे सदा करुणा करनेवाले! हे सर्वव्यापक विभो! आपकी जय हो। देवता हर्षमें भरे हुए पुष्प बरसाते हैं, घमाघम नगाड़े बज रहे हैं। रणभूमिमें श्रीरामचन्द्रजीके अङ्गोंने बहुत-से कामदेवोंकी शोभा प्राप्त की॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 880 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जय कृपा कंद मुकुंद द्वंद हरन सरन सुखप्रद प्रभो।
खल दल बिदारन परम कारन कारुनीक सदा बिभो॥
सुर सुमन बरषहिं हरष संकुल बाज दुंदुभि गहगही।
संग्राम अंगन राम अंग अनंग बहु सोभा लही॥
स्रोत अभिलेख 6.103 · पुस्तक पृ. 879, 880
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1जय कृपा कंद मुकुंद द्वंद हरन सरन सुखप्रद प्रभो।
English explanation
Victory to you, Lord, source of compassion, giver of liberation, remover of conflicting opposites, and giver of happiness to those seeking refuge!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जय | जय हो | victory to you |
| कृपा | करुणा के | of compassion |
| कंद | मूल स्रोत | root source |
| मुकुंद | हे मुक्ति देने वाले प्रभु | O giver of liberation |
| द्वंद | विरोधी द्वंद्वों को | conflicting opposites |
| हरन | हरने वाले | remover of |
| सरन | शरणागतों को | to those seeking refuge |
| सुखप्रद | सुख देने वाले | giver of happiness |
| प्रभो | हे प्रभु | O Lord |
2खल दल बिदारन परम कारन कारुनीक सदा बिभो॥
English explanation
O destroyer of the hosts of the wicked, supreme cause, ever compassionate and all-pervading Lord!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खल | दुष्टों के | of the wicked |
| दल | समूह का | the host |
| बिदारन | विदीर्ण करने वाले | destroyer of |
| परम | सर्वोच्च | supreme |
| कारन | कारण | cause |
| कारुनीक | करुणामय | compassionate |
| सदा | सदैव | always |
| बिभो | हे सर्वव्यापी प्रभु | O all-pervading Lord |
3सुर सुमन बरषहिं हरष संकुल बाज दुंदुभि गहगही।
English explanation
Filled with joy, the gods shower flowers, and kettledrums resound loudly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवता | the gods |
| सुमन | फूल | flowers |
| बरषहिं | बरसाते हैं | shower |
| हरष | आनंद से | with joy |
| संकुल | भरे हुए | filled |
| बाज | बजती हैं | sound |
| दुंदुभि | दुंदुभियाँ | kettledrums |
| गहगही | जोर से गूँजती हुई | with loud reverberation |
4संग्राम अंगन राम अंग अनंग बहु सोभा लही॥
English explanation
On the battlefield, Rama’s form displayed immense beauty, like that of many gods of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संग्राम | युद्ध के | of battle |
| अंगन | आँगन में, रणभूमि में | in the arena |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| अंग | शरीर | form |
| अनंग | कामदेव की | of the god of love |
| बहु | अनेक; बहुत | many; abundant |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| लही | प्राप्त की | acquired |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.103
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 880
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 879, 880
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।