लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
जब कीन्ह तेहिं पाषंड। भए प्रगट जंतु प्रचंड।।
मूल पाठ
जब कीन्ह तेहिं पाषंड। भए प्रगट जंतु प्रचंड।।
बेताल भूत पिसाच। कर धरें धनु नाराच।।1।।
स्रोत अभिलेख 6.101 · पुस्तक पृ. 876, 878
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब उसने पाखण्ड (माया) रचा, तब भयङ्कर जीव प्रकट हो गये। बेताल, भूत और पिशाच हाथोंमें धनुष-बाण लिये प्रकट हुए!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 876 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1जब कीन्ह तेहिं पाषंड। भए प्रगट जंतु प्रचंड।।
English explanation
When Ravana performed that illusory trick, fierce creatures appeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| कीन्ह | किया | performed |
| तेहिं | उसने, रावण ने | he, Ravana |
| पाषंड | मायावी प्रपंच | illusory trick |
| भए | हुए | became |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| जंतु | जीव | creatures |
| प्रचंड | अत्यंत भयानक | fierce and terrifying |
2 बेताल भूत पिसाच। कर धरें धनु नाराच।।1।।
English explanation
Vetalas, ghosts, and flesh-eating spirits held bows and iron arrows in their hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेताल | वेताल, प्रेतविशेष | corpse-haunting spirits |
| भूत | भूत-प्रेत | ghosts |
| पिसाच | पिशाच, मांसभक्षी प्रेत | flesh-eating spirits |
| कर | हाथों में | in their hands |
| धरें | धारण किए हुए | holding |
| धनु | धनुष | bows |
| नाराच | लोहे के बाण | iron arrows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 876
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 876, 878
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।