लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
जन रंजन भंजन सोक भयं। गतक्रोध सदा प्रभु बोधमयं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे प्रभो! आप सेवकोंको आनन्द देनेवाले, शोक और भयका नाश करनेवाले, सदा क्रोधरहित और नित्य ज्ञानस्वरूप हैं। आपका अवतार श्रेष्ठ, अपार दिव्य गुणोंवाला, पृथ्वीका भार उतारनेवाला और ज्ञानका समूह है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 890 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जन रंजन भंजन सोक भयं। गतक्रोध सदा प्रभु बोधमयं।।
अवतार उदार अपार गुनं। महि भार बिभंजन ग्यानघनं।।
स्रोत अभिलेख 6.111 · पुस्तक पृ. 889, 891
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जन रंजन भंजन सोक भयं। गतक्रोध सदा प्रभु बोधमयं।।
English explanation
You delight people and destroy sorrow and fear. O Lord, you are ever free from anger and wholly of the nature of awareness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जन | जनों को | people |
| रंजन | आनंद देने वाले | delighting |
| भंजन | नष्ट करने वाले | destroying |
| सोक | शोक | sorrow |
| भयं | भय | fear |
| गतक्रोध | क्रोध से रहित | free from anger |
| सदा | सदा | always |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| बोधमयं | ज्ञानस्वरूप | consisting of awareness |
2 अवतार उदार अपार गुनं। महि भार बिभंजन ग्यानघनं।।
English explanation
Your incarnation is gracious, and your virtues are boundless. You remove the earth’s burden and are knowledge embodied in its fullness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवतार | अवतार | incarnation |
| उदार | उदार और कृपालु | generous and gracious |
| अपार | असीम | boundless |
| गुनं | गुणों वाले | possessing virtues |
| महि | पृथ्वी का | of the earth |
| भार | भार | burden |
| बिभंजन | दूर करने वाले | removing completely |
| ग्यानघनं | सघन ज्ञानस्वरूप | knowledge embodied in fullness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 890
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 889, 891
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।