लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
कृतकृत्य बिभो सब बानर ए। निरखंति तवानन सादर ए।।
मूल पाठ
कृतकृत्य बिभो सब बानर ए। निरखंति तवानन सादर ए।।
धिग जीवन देव सरीर हरे। तव भक्ति बिना भव भूलि परे।।
स्रोत अभिलेख 6.111 · पुस्तक पृ. 889, 891
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे व्यापक प्रभो! ये सब वानर कृतार्थरूप हैं, जो आदरपूर्वक ये आपका मुख देख रहे हैं। [और] हे हरे! हमारे [अमर] जीवन और देव (दिव्य) शरीरको धिक्कार है, जो हम आपकी भक्तिसे रहित हुए संसारमें (सांसारिक विषयोंमें) भूले पड़े हैं॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 891 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कृतकृत्य बिभो सब बानर ए। निरखंति तवानन सादर ए।।
English explanation
O all-pervading Lord, all these monkeys are fulfilled; they reverently gaze upon your face.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृतकृत्य | कृतार्थ, जीवन का उद्देश्य पा चुके | fulfilled, their purpose accomplished |
| बिभो | हे सर्वव्यापक प्रभु | O all-pervading Lord |
| सब | सभी | all |
| बानर | वानर | monkeys of Rama’s army |
| ए | ये | these |
| निरखंति | निहारते हैं | gaze upon |
| तवानन | आपका मुख | your face |
| सादर | आदरपूर्वक | reverently |
| ए | ये | they |
2 धिग जीवन देव सरीर हरे। तव भक्ति बिना भव भूलि परे।।
English explanation
O Hari, shame upon our lives and divine bodies; without devotion to you, we remain lost in worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धिग | धिक्कार है | shame upon |
| जीवन | जीवन को | life |
| देव | देवताओं का | of the gods |
| सरीर | शरीर | body |
| हरे | हे हरि | O Hari |
| तव | आपकी | your |
| भक्ति | भक्ति | devotion |
| बिना | बिना | without |
| भव | संसार में | in worldly existence |
| भूलि | भ्रमित होकर | being deluded |
| परे | पड़े हैं | remain lost |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 891
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 889, 891
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