लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
अब दीन दयाल दया करिऐ। मति मोरि बिभेदकरी हरिऐ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे दीनदयालु! अब दया कीजिये और मेरी उस विभेद उत्पन्न करनेवाली बुद्धिको हर लीजिये, जिससे मैं विपरीत कर्म करता हूँ और जो दु:ख है, उसे सुख मानकर आनन्दसे विचरता हूँ॥ १०॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 891 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अब दीन दयाल दया करिऐ। मति मोरि बिभेदकरी हरिऐ।।
जेहि ते बिपरीत क्रिया करिऐ। दुख सो सुख मानि सुखी चरिऐ।।
स्रोत अभिलेख 6.111 · पुस्तक पृ. 889, 891
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अब दीन दयाल दया करिऐ। मति मोरि बिभेदकरी हरिऐ।।
English explanation
Now, O compassionate Lord of the helpless, show mercy. Remove my understanding that creates divisions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| दीन | दीनों पर | toward the helpless |
| दयाल | हे दयालु | O compassionate one |
| दया | कृपा | mercy |
| करिऐ | कीजिए | please show |
| मति | बुद्धि | understanding |
| मोरि | मेरी | my |
| बिभेदकरी | भेद पैदा करने वाली | creating divisions |
| हरिऐ | हर लीजिए | please remove |
2 जेहि ते बिपरीत क्रिया करिऐ। दुख सो सुख मानि सुखी चरिऐ।।
English explanation
Because of that understanding, we act wrongly and go about imagining ourselves happy, mistaking suffering for happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिसके | which |
| ते | कारण | because of |
| बिपरीत | उलटे, अनुचित | contrary, wrongful |
| क्रिया | कर्म | actions |
| करिऐ | करते हैं | we perform |
| दुख | दुःख | suffering |
| सो | उसे | that |
| सुख | सुख | happiness |
| मानि | मानकर | taking to be |
| सुखी | अपने को सुखी समझते हुए | thinking ourselves happy |
| चरिऐ | विचरते हैं | go about |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 891
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 889, 891
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।