लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
अनवद्य अखंड न गोचर गो। सबरूप सदा सब होइ न गो।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआप अनिन्द्य या दोषरहित हैं, अखण्ड हैं, इन्द्रियोंके विषय नहीं हैं। सदा सर्वरूप होते हुए भी आप वह सब कभी हुए ही नहीं, ऐसा वेद कहते हैं। यह [कोई] दन्तकथा (कोरी कल्पना) नहीं है। जैसे सूर्य और सूर्यका प्रकाश अलग-अलग हैं और अलग नहीं भी हैं, वैसे ही आप भी संसारसे भिन्न तथा अभिन्न दोनों ही हैं॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 891 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अनवद्य अखंड न गोचर गो। सबरूप सदा सब होइ न गो।।
इति बेद बदंति न दंतकथा। रबि आतप भिन्नमभिन्न जथा।।
स्रोत अभिलेख 6.111 · पुस्तक पृ. 889, 891
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अनवद्य अखंड न गोचर गो। सबरूप सदा सब होइ न गो।।
English explanation
You are flawless, undivided, and beyond the senses’ reach. You eternally assume all forms; though being all, you are not an object of the senses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनवद्य | निर्दोष | flawless |
| अखंड | अविभाजित | undivided |
| न | नहीं | not |
| गोचर | पहुँच या ग्रहण में | within reach or perception |
| गो | इंद्रियों की | of the senses |
| सबरूप | सब रूपों वाले | having all forms |
| सदा | सदा | always |
| सब | सब कुछ | everything |
| होइ | होकर भी | though being |
| न | नहीं | not |
| गो | इंद्रियों के विषय | an object of the senses |
2 इति बेद बदंति न दंतकथा। रबि आतप भिन्नमभिन्न जथा।।
English explanation
Thus speak the Vedas; this is no hearsay tale. It is like the sun and its sunlight, distinct yet inseparable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इति | ऐसा | thus |
| बेद | वेद | the Vedas |
| बदंति | कहते हैं | say |
| न | नहीं | not |
| दंतकथा | सुनी-सुनाई कथा | hearsay tale |
| रबि | सूर्य | sun |
| आतप | धूप, सूर्यप्रकाश | sunlight |
| भिन्नमभिन्न | भिन्न और अभिन्न | distinct and non-distinct |
| जथा | जैसे | as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 891
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 889, 891
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।