लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
उर माझ गदा प्रहार घोर कठोर लागत महि पर्यो।
मूल पाठ
उर माझ गदा प्रहार घोर कठोर लागत महि पर्यो।
दस बदन सोनित स्रवत पुनि संभारि धायो रिस भर्यो॥
द्वौ भिरे अतिबल मल्लजुद्ध बिरुद्ध एकु एकहि हनै।
रघुबीर बल दॢपत बिभीषनु घालि नहिं ता कहुँ गनै॥
स्रोत अभिलेख 6.94 · पुस्तक पृ. 867, 868
भावार्थ
मूल पाठ के बादबीच छातीमें कठोर गदाकी घोर और कठिन चोट लगते ही वह पृथ्वीपर गिर पड़ा। उसके दसों मुखोंसे रुधिर बहने लगा; वह अपनेको फिर सँभालकर क्रोधमें भरा हुआ दौड़ा। दोनों अत्यन्त बलवान् योद्धा भिड़ गये और मल्लयुद्धमें एक दूसरेके विरुद्ध होकर मारने लगे। श्रीरघुवीरके बलसे गॢवत विभीषण उसको (रावण-जैसे जगद्विजयी योद्धाको) पासंगके बराबर भी नहीं समझते।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 868 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1उर माझ गदा प्रहार घोर कठोर लागत महि पर्यो।
English explanation
As the fierce, heavy mace-blow struck the middle of his chest, Ravana fell to the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उर | छाती | chest |
| माझ | के बीच में | in the middle of |
| गदा | गदा का | of a mace |
| प्रहार | वार | blow |
| घोर | भयंकर | fierce |
| कठोर | कठोर; भारी | hard; heavy |
| लागत | लगते ही | upon striking |
| महि | धरती पर | on the ground |
| पर्यो | गिर पड़ा | fell down |
2दस बदन सोनित स्रवत पुनि संभारि धायो रिस भर्यो॥
English explanation
Blood streamed from his ten mouths; then, recovering himself, he charged, filled with anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दस | दसों | all ten |
| बदन | मुखों से | from the mouths |
| सोनित | रक्त | blood |
| स्रवत | बह रहा था | was flowing |
| पुनि | फिर | then; again |
| संभारि | अपने को सँभालकर | having recovered himself |
| धायो | दौड़ा; आक्रमण करने बढ़ा | charged forward |
| रिस | क्रोध से | with anger |
| भर्यो | भर गया | filled |
3द्वौ भिरे अतिबल मल्लजुद्ध बिरुद्ध एकु एकहि हनै।
English explanation
The two immensely strong opponents grappled in wrestling combat, each striking the other.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| द्वौ | दोनों | both |
| भिरे | भिड़ गए | clashed |
| अतिबल | अत्यंत बलवान | immensely strong |
| मल्लजुद्ध | मल्लयुद्ध में; कुश्ती में | in wrestling combat |
| बिरुद्ध | एक-दूसरे के विरुद्ध | opposing one another |
| एकु | एक योद्धा | one combatant |
| एकहि | दूसरे को | the other |
| हनै | मारता है | strikes |
4रघुबीर बल दॢपत बिभीषनु घालि नहिं ता कहुँ गनै॥
English explanation
Proud and fearless through Rama’s strength, Vibhishana gives Ravana no importance at all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुबीर | रघुवंश के वीर श्रीराम के | of Rama, the hero of Raghu’s lineage |
| बल | बल से | through the strength |
| दॢपत | गर्वित; आत्मबल से भरा | proud; emboldened |
| बिभीषनु | विभीषण, रावण के भाई | Vibhishana, Ravana’s brother |
| घालि | महत्त्व देकर; गणना में रखकर | giving weight to; taking into account |
| नहिं | नहीं | not |
| ता | उस रावण | that Ravana |
| कहुँ | को | as the object of reckoning |
| गनै | गिनते हैं; समझते हैं | reckons; regards |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.94
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 868
- सहायक विषय
- रावणका विभीषणपर शक्ति छोड़ना, रामजीका शक्तिको अपने ऊपर लेना, विभीषण-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 867, 868
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।