लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हैं दससीस मनुज रघुनायक। जाके हनूमान से पायक।।
मूल पाठ
हैं दससीस मनुज रघुनायक। जाके हनूमान से पायक।।
अहह बंधु तैं कीन्हि खोटाई। प्रथमहिं मोहि न सुनाएहि आई।।
स्रोत अभिलेख 6.63 · पुस्तक पृ. 832, 833
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे रावण! जिनके हनुमान्-सरीखे सेवक हैं, वे श्रीरघुनाथजी क्या मनुष्य हैं? हाय भाई! तूने बुरा किया, जो पहले ही आकर मुझे यह हाल नहीं सुनाया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 832 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हैं दससीस मनुज रघुनायक। जाके हनूमान से पायक।।
English explanation
O ten-headed Ravana, can the lord of Raghu's line be an ordinary human, when he has servants such as Hanuman?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हैं | क्या हैं | can he be |
| दससीस | हे दस सिरों वाले रावण | O ten-headed Ravana |
| मनुज | साधारण मनुष्य | an ordinary human |
| रघुनायक | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu's line |
| जाके | जिनके | whose |
| हनूमान | रामभक्त हनुमान | Hanuman, Rama's devotee |
| से | जैसे | such as |
| पायक | सेवक | servants |
2 अहह बंधु तैं कीन्हि खोटाई। प्रथमहिं मोहि न सुनाएहि आई।।
English explanation
Alas, brother, you did wrong by not coming and telling me this at the outset.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अहह | हाय | alas |
| बंधु | हे भाई | O brother |
| तैं | तुमने | you |
| कीन्हि | की | committed |
| खोटाई | गलती | a wrong |
| प्रथमहिं | पहले ही | at the very outset |
| मोहि | मुझे | me |
| न | नहीं | not |
| सुनाएहि | तुमने बताया | you told |
| आई | आकर | having come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.63
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 832
- सहायक विषय
- रावणका कुम्भकर्णको जगाना, कुम्भकर्णका रावणको उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 832, 833
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