लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कीन्हेहु प्रभू बिरोध तेहि देवक। सिव बिरंचि सुर जाके सेवक।।
मूल पाठ
कीन्हेहु प्रभू बिरोध तेहि देवक। सिव बिरंचि सुर जाके सेवक।।
नारद मुनि मोहि ग्यान जो कहा। कहतेउँ तोहि समय निरबहा।।
स्रोत अभिलेख 6.63 · पुस्तक पृ. 832, 833
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे स्वामी! तुमने उस परम देवताका विरोध किया, जिसके शिव, ब्रह्मा आदि देवता सेवक हैं। नारद मुनिने मुझे जो ज्ञान कहा था, वह मैं तुझसे कहता; पर अब तो समय जाता रहा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 833 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कीन्हेहु प्रभू बिरोध तेहि देवक। सिव बिरंचि सुर जाके सेवक।।
English explanation
My lord, you have opposed that divine Lord whose servants are Shiva, Brahma, and the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्हेहु | तुमने किया | you undertook |
| प्रभू | हे स्वामी | my lord |
| बिरोध | विरोध | opposition |
| तेहि | उन | that |
| देवक | देव का | divine Lord |
| सिव | भगवान शिव | Shiva |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| सुर | देवता | the gods |
| जाके | जिनके | whose |
| सेवक | सेवक | servants |
2 नारद मुनि मोहि ग्यान जो कहा। कहतेउँ तोहि समय निरबहा।।
English explanation
I would have told you the wisdom that sage Narada imparted to me, but the time has passed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| मुनि | मुनि | sage |
| मोहि | मुझे | to me |
| ग्यान | ज्ञान | wisdom |
| जो | जो | which |
| कहा | बताया | imparted |
| कहतेउँ | मैं कहता | I would have told |
| तोहि | तुम्हें | you |
| समय | समय | the time |
| निरबहा | बीत गया | has elapsed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.63
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 833
- सहायक विषय
- रावणका कुम्भकर्णको जगाना, कुम्भकर्णका रावणको उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 832, 833
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