लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हित मत तोहि न लागत कैसें। काल बिबस कहुँ भेषज जैसें।।
मूल पाठ
हित मत तोहि न लागत कैसें। काल बिबस कहुँ भेषज जैसें।।
संध्या समय जानि दससीसा। भवन चलेउ निरखत भुज बीसा।।
स्रोत अभिलेख 6.1 · पुस्तक पृ. 781, 781
भावार्थ
मूल पाठ के बादहितकी सलाह आपको कैसे नहीं लगती (आपपर कैसे असर नहीं करती), जैसे मृत्युके वश हुए [रोगी] को दवा नहीं लगती। सन्ध्याका समय जानकर रावण अपनी बीसों भुजाओंको देखता हुआ महलको चला॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 781 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हित मत तोहि न लागत कैसें। काल बिबस कहुँ भेषज जैसें।।
English explanation
“How is it that beneficial advice does not please you—just as medicine does not please someone in death’s grip!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हित | हितकारी | beneficial |
| मत | सलाह | advice |
| तोहि | तुम्हें | to you |
| न | नहीं | not |
| लागत | अच्छी लगती | seems pleasing |
| कैसें | कैसे | how |
| काल | मृत्यु के | death’s |
| बिबस | वश में पड़े व्यक्ति | one in its grip |
| कहुँ | को | to |
| भेषज | औषधि | medicine |
| जैसें | जिस तरह | just as |
2 संध्या समय जानि दससीसा। भवन चलेउ निरखत भुज बीसा।।
English explanation
Recognizing that it was evening, Ravana went toward his palace, gazing at his twenty arms.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संध्या | साँझ का | evening |
| समय | समय | time |
| जानि | जानकर | recognizing |
| दससीसा | दस सिरों वाला रावण | ten-headed Ravana |
| भवन | भवन की ओर | toward the palace |
| चलेउ | चला | went |
| निरखत | देखते हुए | gazing at |
| भुज | भुजाओं को | arms |
| बीसा | बीस | twenty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 781
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 781, 781
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।